उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है. राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में हल्की बारिश और बादलों की आवाजाही बनी हुई है, लेकिन पूरे प्रदेश में मानसून की सक्रियता पहले जैसी नहीं रही. मौसम विभाग ने 33 जिलों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है. दूसरी ओर कई नदियां खतरे के स्तर के करीब बह रही हैं, जिससे नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ गई है.
मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को प्रदेश के 33 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है. लखनऊ सहित कई इलाकों में सुबह से रिमझिम बारिश और ठंडी हवाओं ने मौसम को सुहावना बनाया. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यापक मानसूनी बारिश नहीं है और अधिकतर क्षेत्रों में बादलों की सक्रियता सीमित बनी हुई है.
भारी बारिश का असर पहाड़ी क्षेत्रों से निकलने वाली नदियों पर साफ दिखाई दे रहा है. प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने से घाटों के किनारे तक पानी पहुंच गया है. बिजनौर में मालन नदी उफान पर बह रही है. बलिया में सरयू और घाघरा के किनारों पर कटान शुरू होने से कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा.
मौसम विभाग का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से आने वाली शुष्क हवाओं के कारण प्रदेश के बड़े हिस्से में मानसूनी बादल कमजोर पड़ गए हैं. इसी वजह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अगले छह से सात दिनों तक भारी बारिश की संभावना कम है. पूर्वी हिस्सों में 17 और 18 जुलाई के बाद फिर से बारिश बढ़ सकती है.
प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 22 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. लगातार कम बारिश का असर धान सहित खरीफ की फसलों पर पड़ने लगा है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो खेती के साथ तापमान और उमस दोनों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले तीन से चार दिनों तक मौसम में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा. कुछ स्थानों पर हल्की बारिश जरूर हो सकती है, लेकिन व्यापक वर्षा की संभावना फिलहाल कम है. हवाओं का रुख बदलने के बाद मानसून दोबारा सक्रिय होने की उम्मीद जताई गई है, जिससे किसानों और आम लोगों को राहत मिल सकती है.