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अब काम नहीं तो मिलेगा पैसा, योगी सरकार का बड़ा फैसला; जानिए किन लोगों को होगा सीधा फायदा

उत्तर प्रदेश में 1 जुलाई से ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. योगी सरकार ने नई ग्रामीण रोजगार योजना को मंजूरी दे दी है. इसके तहत पंजीकरण के बाद 15 दिन के भीतर काम नहीं मिलने पर मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता मिलेगा.

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Edited By: Reepu Kumari
अब काम नहीं तो मिलेगा पैसा, योगी सरकार का बड़ा फैसला; जानिए किन लोगों को होगा सीधा फायदा
Courtesy: ANI

उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण श्रमिकों के लिए नई रोजगार व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. एक जुलाई से नई योजना के तहत पात्र श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने की गारंटी दी जाएगी. निर्धारित समय में काम नहीं मिलने पर आर्थिक सहायता भी दी जाएगी. योगी कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इस योजना के लागू होने का रास्ता साफ हो गया है. योजना में रोजगार, समय पर भुगतान, सामाजिक सुरक्षा और शिकायत निवारण जैसी कई नई सुविधाएं शामिल की गई हैं. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों को पहले से अधिक सुरक्षा और लाभ मिलने की उम्मीद है.

मनरेगा की जगह लागू होगी नई योजना

उत्तर प्रदेश में एक जुलाई से मनरेगा के स्थान पर विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन ग्रामीण (वीबी जीरामजी) लागू किया जाएगा. राज्य सरकार के अनुसार योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की उपलब्धता सुनिश्चित करना है. इसके लिए कैबिनेट ने ग्राम विकास विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. योजना के खर्च का 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी.

15 दिन में काम नहीं तो मिलेगा बेरोजगारी भत्ता

नई व्यवस्था के तहत पंजीकरण कराने वाले श्रमिकों को 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा. यदि तय समय में काम नहीं मिलता है तो 16वें दिन से दैनिक बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा. वहीं मजदूरी का भुगतान 15 दिन के भीतर नहीं होने पर प्रतिदिन 0.05 प्रतिशत की दर से विलंब मुआवजा भी मिलेगा. इससे श्रमिकों के अधिकारों को और मजबूत बनाया गया है.

एक साल में 125 दिन तक मिलेगा रोजगार

योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के अकुशल श्रमिकों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार देने का प्रावधान किया गया है. खेती के व्यस्त मौसम के लिए 60 दिन आरक्षित रहेंगे और इस दौरान योजना के अंतर्गत कार्य नहीं कराया जाएगा. योजना में जल संरक्षण, ग्रामीण विकास, आजीविका संवर्धन और आपदा तैयारी से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी.

ग्राम पंचायत से लेकर मुख्यमंत्री तक होगी निगरानी

योजना के संचालन के लिए राज्य, जिला और पंचायत स्तर पर अलग-अलग समितियां बनाई जाएंगी. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद कार्य करेगी. जिलों में जिलाधिकारी कार्यक्रम समन्वयक होंगे, जबकि ब्लॉक स्तर पर बीडीओ और ग्राम पंचायतें पंजीकरण, रोजगार कार्ड जारी करने तथा कार्यों के संचालन की जिम्मेदारी निभाएंगी.

मुफ्त इलाज, बीमा और शिकायत सुनवाई की सुविधा

योजना में कार्यस्थल पर श्रमिकों की उपस्थिति बायोमेट्रिक प्रणाली से दर्ज की जाएगी. काम के दौरान दुर्घटना होने पर जरूरत के अनुसार मुफ्त उपचार उपलब्ध कराया जाएगा. मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत लाभ मिलेगा. शिकायतों के निस्तारण के लिए प्रत्येक सप्ताह सुनवाई की व्यवस्था रहेगी. नियमों के उल्लंघन पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है.