प्रतापगढ़: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और प्रतापगढ़ जिलों से जुड़ा एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक व्यक्ति ने एक ही समय में दो अलग अलग सरकारी विभागों में नौकरी हासिल कर ली और सालों तक दोनों ही दफ्तरों से सैलरी लेता रहा. करीब 17 सालों से ज्यादा समय तक यह खेल चलता रहा. लेकिन आखिरकार मामला सामने आया और अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 7 साल की सजा सुनाई है.
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने आरोपी जयप्रकाश सिंह को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. अदालत ने सरकारी खजाने से लिए गए वेतन की वसूली का आदेश भी दिया है.
यह पूरा मामला सतरिख थाना क्षेत्र के नरौली गांव निवासी जयप्रकाश सिंह से जुड़ा है. आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर दो अलग अलग सरकारी विभागों में नौकरी हासिल कर ली थी. जांच में पता चला कि जयप्रकाश सिंह की नियुक्ति जून 1993 में बाराबंकी जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर हुई थी. लेकिन इससे पहले ही वह प्रतापगढ़ जिले के स्वास्थ्य विभाग में नॉन मेडिकल असिस्टेंट के पद पर 26 दिसंबर 1979 को नियुक्त हो चुके थे. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उन्होंने दोनों विभागों में एक ही मार्कशीट और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था.
सरकारी नियमों के अनुसार कोई भी कर्मचारी एक समय में केवल एक ही सरकारी नौकरी कर सकता है. लेकिन जयप्रकाश सिंह के मामले में यह नियम पूरी तरह नजरअंदाज किया गया. करीब 17 साल तक वह दोनों जिलों में सरकारी कर्मचारी के रूप में दर्ज रहे. दोनों विभागों के रिकॉर्ड में उनका नाम मौजूद था और उन्हें नियमित रूप से वेतन और भत्ते भी मिलते रहे. यह सवाल भी उठता रहा कि आखिर इतने लंबे समय तक यह मामला अधिकारियों की नजर से कैसे बचा रहा.
इस मामले का खुलासा साल 2009 में हुआ. शहर की आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रभात सिंह ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि जयप्रकाश सिंह ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दो अलग अलग जगहों पर सरकारी नौकरी हासिल की है. इसके बाद सूचना के अधिकार के तहत संबंधित विभागों से जानकारी मांगी गई. जब दोनों जिलों के रिकॉर्ड की जांच की गई तो चौंकाने वाला सच सामने आया.