लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रावण माह को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि श्रावण माह लोकमंगल, श्रम का सम्मान और सामूहिकता का पवित्र पर्व है.
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस महीने प्रकृति नवसृजन का संदेश देती है. किसानों का कठिन परिश्रम हरी-भरी फसलों और समृद्धि के रूप में दिखाई देने लगता है. सनातन संस्कृति में प्रकृति का यही नया उत्साह भगवान शिव की आराधना से जुड़ा है. यह हमें संयम, सेवा और सबके साथ मिल-जुलकर रहने का रास्ता दिखाता है.
मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों,
श्रावण माह लोकमंगल, श्रम-सम्मान एवं सामूहिकता का पावन पर्व है। प्रकृति नवसृजन का संदेश देती है तथा अन्नदाता का परिश्रम हरित समृद्धि के रूप में फलीभूत होने लगता है। सनातन संस्कृति में प्रकृति का यही नवोन्मेष शिव-आराधना से जुड़कर जीवन को संयम, सेवा और… pic.twitter.com/wA51a5CQgX
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) August 3, 2026
योगी आदित्यनाथ ने भगवान महादेव को प्रकृति का बोध कराने वाले देवता बताया. उन्होंने कहा कि महादेव की जटाओं में बहने वाली गंगा, माथे पर चांद, गले में सर्प, नंदी जी और उनके गण- ये सब हमें प्रकृति के साथ मिलकर रहने का संदेश देते हैं. प्रकृति और मनुष्य के बीच तालमेल जरूरी है.
मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों से संकल्प लेने को कहा कि श्रावण माह को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण बढ़ाने और सामाजिक भागीदारी का महीना बनाएं. हर बूंद पानी का सम्मान करें और हर पौधे की रक्षा करें. यही श्रावण का असली मतलब है.
उन्होंने जोर दिया कि यही संदेश समृद्ध, सुरक्षित और विकसित उत्तर प्रदेश की नींव है. पर्यावरण की रक्षा और सामुदायिक सहयोग से प्रदेश आगे बढ़ सकता है. श्रावण माह में लोग भगवान शिव की पूजा करते हैं, कांवड़ यात्रा निकालते हैं और प्रकृति के करीब रहने की कोशिश करते हैं. मुख्यमंत्री का यह संदेश याद दिलाता है कि पूजा के साथ-साथ पर्यावरण की देखभाल भी जरूरी है. स्वच्छता अभियान चलाएं, पानी बचाएं, पेड़ लगाएं और दूसरों की मदद करें.
यह संदेश किसानों, युवाओं और आम नागरिकों सभी के लिए है. प्रकृति की रक्षा करके हम आने वाली पीढ़ियों को बेहतर भविष्य दे सकते हैं. योगी आदित्यनाथ का यह आह्वान श्रावण के पावन अवसर पर प्रेरणा देने वाला है.