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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, कहा- 'आसमान नहीं गिर पड़ेगा'

सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर चढ़ावा मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि मामले में इतनी जल्दबाजी की जरूरत नहीं है और नियमित प्रक्रिया के तहत गर्मी की छुट्टियों के बाद सुनवाई की जाएगी.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, कहा- 'आसमान नहीं गिर पड़ेगा'
Courtesy: Pinterest

राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में दाखिल याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से मना कर दिया. अदालत ने कहा कि इस मामले को नियमित प्रक्रिया के अनुसार गर्मी की छुट्टियों के बाद सूचीबद्ध किया जाएगा. सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, 'आसमान नहीं गिर पड़ेगा, इसमें जल्दबाजी क्या है.' 

तत्काल सुनवाई की मांग क्यों हुई?

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंद्रेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के सामने याचिकाकर्ताओं की ओर से मामले की जल्द सुनवाई का आग्रह किया गया था. याचिका में मांग की गई कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के नेतृत्व में गठित बहु-विषयक विशेष जांच दल से कराई जाए. साथ ही अदालत से ऐसी व्यवस्था बनाने का अनुरोध किया गया, जिससे दान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और श्रद्धालुओं का भरोसा बना रहे.

डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने की भी मांग

इस मामले में एक दूसरी याचिका भी दाखिल की गई, जिसमें मंदिर से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का अनुरोध किया गया है. याचिका में सीसीटीवी फुटेज, डीवीआर, एनवीआर, हार्ड डिस्क, क्लाउड बैकअप, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड, क्यूआर और यूपीआई लेनदेन, बैंक जमा रिकॉर्ड, दान रजिस्टर तथा अन्य संबंधित दस्तावेजों को संरक्षित रखने की मांग की गई. हालांकि अदालत ने इस याचिका पर भी तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही इसे सूचीबद्ध किया जाएगा.

एसआईटी रिपोर्ट और आगे की जांच की मांग

याचिकाओं में यह भी अनुरोध किया गया है कि उत्तर प्रदेश की विशेष जांच टीम (एसआईटी) अपनी जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने पेश करे. साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि अदालत को मौजूदा जांच पर्याप्त नहीं लगती, तो मामले की जांच सीबीआई या अदालत की निगरानी में गठित स्वतंत्र एसआईटी से कराई जाए. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित हो सकेगी.

अब नियमित सुनवाई का इंतजार

सुप्रीम कोर्ट के तत्काल सुनवाई से इनकार करने के बाद अब इस मामले की अगली सुनवाई नियमित सूची के अनुसार होगी. फिलहाल अदालत ने किसी भी जांच एजेंसी को नया निर्देश जारी नहीं किया है. ऐसे में अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अगली सुनवाई में अदालत क्या रुख अपनाती है और जांच से जुड़ी मांगों पर क्या फैसला देती है. तब तक यह मामला कानूनी और सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बना रहने की संभावना है.