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दिग्गज पत्रकार के पासपोर्ट को लेकर घमासान, केरल के मुख्यमंत्री ने बंगाल के सीएम को लिखी चिट्ठी

पूर्व संपादक आर. राजगोपाल के पासपोर्ट नवीनीकरण में कथित देरी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. केरल के मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है, जबकि विपक्षी नेताओं ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
दिग्गज पत्रकार के पासपोर्ट को लेकर घमासान, केरल के मुख्यमंत्री ने बंगाल के सीएम को लिखी चिट्ठी
Courtesy: @WaqarHasan1231

वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व संपादक आर. राजगोपाल के पासपोर्ट नवीनीकरण का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है. केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है. उनका कहना है कि पुलिस सत्यापन रिपोर्ट के कारण पासपोर्ट नवीनीकरण में देरी हो रही है. इस बीच कई राजनीतिक नेताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और निष्पक्ष समाधान की मांग की है.

पासपोर्ट नवीनीकरण में देरी पर उठे सवाल

केरल के मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि आर. राजगोपाल के पासपोर्ट नवीनीकरण का आवेदन कथित रूप से कोलकाता पुलिस की प्रतिकूल सत्यापन रिपोर्ट के कारण लंबित है. पत्र में उल्लेख किया गया कि यह रिपोर्ट मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान उनका नाम हटाए जाने से जुड़ी बताई जा रही है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मतदाता सूची से जुड़े मामले पर अलग से कानूनी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इसका असर पासपोर्ट नवीनीकरण पर पड़ना चिंता का विषय है. उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार से इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप का अनुरोध किया.

पत्रकार के लंबे करियर का भी किया जिक्र

अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने आर. राजगोपाल को देश के प्रतिष्ठित पत्रकारों में से एक बताया. उन्होंने लिखा कि राजगोपाल पिछले लगभग तीन दशक से कोलकाता में रहकर पत्रकारिता कर रहे हैं और उन्होंने लंबे समय तक एक प्रमुख समाचार पत्र के संपादक के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई है. मुख्यमंत्री ने उनके पारिवारिक योगदान का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि उनके पिता प्रोफेसर वी. रामदास सार्वजनिक जीवन में सम्मानित व्यक्तित्व रहे हैं. पत्र के साथ राजगोपाल के संपर्क संबंधी विवरण भी भेजे गए, ताकि मामले का शीघ्र समाधान हो सके.

राजनीतिक नेताओं ने भी जताई प्रतिक्रिया

इस मामले पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति के साथ कथित रूप से अन्याय होने का आरोप सामने आता है, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी दलों को निष्पक्ष समाधान के लिए आगे आना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर अनावश्यक सवाल खड़े होते हैं. दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इतने वर्षों से कोलकाता में रहने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार को इस तरह की स्थिति का सामना करना दुर्भाग्यपूर्ण है.

अब समाधान की ओर टिकी निगाहें

फिलहाल इस मामले में पासपोर्ट नवीनीकरण को लेकर अंतिम फैसला नहीं आया है. राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं. चूंकि मतदाता सूची और पासपोर्ट नवीनीकरण दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं, इसलिए आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है. आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाला निर्णय न केवल संबंधित पक्षों बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.