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'कानून निर्दोषों को परेशान करने का हथियार नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने यूपी धर्म परिवर्तन कानून के तहज दर्ज कई FIR कीं रद्द

Supreme Court quashes multiple FIRs: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सामूहिक धर्म परिवर्तन के आरोपों से जुड़े कई एफआईआर को रद्द करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि आपराधिक कानून का इस्तेमाल निर्दोष नागरिकों को परेशान करने के लिए नहीं किया जा सकता.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'कानून निर्दोषों को परेशान करने का हथियार नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने यूपी धर्म परिवर्तन कानून के तहज दर्ज कई FIR कीं रद्द
Courtesy: social media

Supreme Court quashes multiple FIRs:  देश की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐतिहासिक निर्णय में साफ किया है कि धर्म परिवर्तन कानून का दुरुपयोग कर निर्दोष लोगों को निशाना नहीं बनाया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की बेंच ने शुक्रवार को सामूहिक धर्म परिवर्तन के आरोपों से जुड़े पांच एफआईआर को रद्द कर दिया, जो उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में साम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी के कुलपति राजेंद्र बिहारी लाल और उनके सहयोगियों पर दर्ज की गई थीं. अदालत ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है और यह 'न्याय का मजाक' होगी.

158 पन्नों के विस्तृत फैसले में अदालत ने कहा कि आपराधिक कानून को उत्पीड़न का साधन नहीं बनाया जा सकता. जस्टिस पारदीवाला ने लिखा कि जांच में न तो कोई ठोस सबूत मिला, न ही शिकायतकर्ता के पास मामला दर्ज कराने का वैधानिक अधिकार था. उन्होंने कहा कि जब कानूनी प्रक्रिया ही दोषपूर्ण हो, तो ऐसे मामलों को जारी रखना न्याय की विफलता होगी. अदालत ने कहा कि शिकायत दर्ज करने वाला व्यक्ति 'असंबंधित तीसरा पक्ष' था, जिसे उस समय कानून के तहत ऐसा करने की अनुमति नहीं थी.

2021 का कानून और 2024 संशोधन पर कोर्ट की व्याख्या

अदालत ने साफ किया कि उत्तर प्रदेश धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत केवल पीड़ित व्यक्ति, उसके परिवार या कानूनी अभिकर्ता को ही शिकायत करने का अधिकार था. 2024 में कानून में संशोधन के बाद यह प्रावधान बदला गया, जिससे कोई भी व्यक्ति शिकायत दर्ज करा सकता है, लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह संशोधन पिछली तारीख से लागू नहीं हो सकता. इसलिए 2021 में दर्ज इन मामलों में पुराने कानून के प्रावधान ही लागू होंगे.

कुछ आरोपों की जांच अभी जारी रहेगी

सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि यह भी कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत लगाए गए कुछ आरोपों की जांच अभी जारी रहेगी. अदालत ने इस संबंध में कहा कि 'इन धाराओं को फिलहाल बंद नहीं किया गया है, लेकिन गिरफ्तारी पर लगी रोक जारी रहेगी.' इस तरह, अदालत ने निष्पक्ष जांच का रास्ता खुला रखा है, जबकि गलत तरीके से दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया.

SHUATS का संदर्भ और फैसले का व्यापक असर

प्रयागराज स्थित साम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी (पहले इलाहाबाद एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी) लंबे समय से उत्तर प्रदेश की प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं में से एक रही है. इस फैसले को विशेषज्ञ 'न्यायिक विवेक' की मिसाल मान रहे हैं, जो यह संदेश देता है कि धार्मिक स्वतंत्रता के मामलों में जल्दबाजी या पूर्वाग्रह से की गई कानूनी कार्रवाई को अदालत बर्दाश्त नहीं करेगी. यह फैसला भविष्य में धर्मांतरण कानूनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक नजीर साबित हो सकता है.