12 साल तक कबाड़ में दबा रहा स्टेट अवॉर्ड, लापरवाही के चलते शादी के बाद मिला 10वीं का सर्टिफिकेट
ग्रेटर नोएडा में रहने वाली एक महिला को स्काउट-गाइड स्टेट अवॉर्ड का सर्टिफिकेट 12 साल बाद मिला. विभागीय लापरवाही के चलते यह सर्टिफिकेट कबाड़ के कागजों के बीच पड़ा रह गया था.
ग्रेटर नोएडा: इस देश में सरकारी काम को लेकर लापरवाही लगातार होती रहती हैं. इसी के चलते करोड़ों युवाअ कड़ी मेहनत और हूनर के बाद भी अपने जीवन में पीछे रह जाते हैं. ऐसी ही एक दुखद मंजर ग्रेटर नोएडा में दिखा. खटाना गांव की रहने वाली राखी ने 2013 में स्काउट्स एंड गाइड्स में राज्य-स्तरीय अवॉर्ड जीता था. राखी को लगा की अब इस अवॉर्ड के जरिए देश के लिए कुछ बेहतर करेंगी, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के चलते उनका सर्टिफिकेट 12 साल तक फाइलों में ही दबकर रह गया. आखिरकार राखी को जब यह सम्मान मिला, तब तक काफी समय बीत चुका था. राखी के करियर को बेहतर करने वाले मौकों से वह वंचित रह गई.
10वीं क्लास में जीता स्टेट अवॉर्ड
ग्रेटर नोएडा के खटाना गांव में स्थित महाराणा कुंभा इंटर कॉलेज में राखी 10वीं क्लास की छात्रा थी. उन्होंने 2013 में स्काउट्स एंड गाइड्स की गतिविधियों में अपने बेहतरीन प्रदर्शन के लिए स्टेट अवॉर्ड जीता था. यह उपलब्धि उन्हें आगे बढ़ने और बड़े मंचों तक पहुंचने के मौके दे सकती थी. 11 फरवरी 2014 को जारी किया गया यह सर्टिफिकेट उसे कभी सौंपा ही नहीं गया, बल्कि इसके बजाय यह विभागीय फाइलों में ही दबा रह गया.
कबाड़ के ढेर में मिला सर्टिफिकेट
यह मामला तब सामने आया जब विभाग में अधिकारियों में बदलाव हुआ और पुराने दस्तावेजों की सफाई का काम शुरू किया गया. इसी प्रक्रिया के दौरान, राखी के नाम वाला सर्टिफिकेट कबाड़ के कागजों के ढेर के बीच मिला. यह स्थिति न सिर्फ घोर लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि व्यवस्था में मौजूद गंभीर कमियों को भी बेनकाब करती है.
समय पर मिलने पर बदल सकता था भविष्य
सर्टिफिकेट मिलने के बाद, अधिकारियों ने राखी की तलाश शुरू की, लेकिन, तब तक उसकी शादी हो चुकी थी और वह अपने परिवार के साथ हापुड़ के पिलखुवा इलाके में रह रही थी. जिला स्काउट और गाइड टीम की कोशिशों की बदौलत, राखी का पता चल गया. स्कूल से उसकी जानकारी लेने के बाद, अधिकारी उसके गांव पहुंचे. उसको ससुराल से बुलाया गया और सर्टिफिकेट दिया गया. राखी ने बताया कि अगर उसे यह सर्टिफिकेट समय पर मिल गया होता, तो उसके करियर की दिशा पूरी तरह से अलग हो सकती थी.