संभल: उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा के मामले में न्यायिक आदेश के बाद अब प्रशासनिक निर्णय चर्चा में है. चंदौसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर का तबादला होते ही जिला न्यायालय परिसर में विरोध शुरू हो गया. अधिवक्ताओं का कहना है कि यह तबादला ऐसे समय किया गया, जब उन्होंने एक संवेदनशील मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था. इस फैसले ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
संभल हिंसा मामले में अहम आदेश देने वाले सीजेएम विभांशु सुधीर का तबादला कर उन्हें सुल्तानपुर भेज दिया गया है. उनके स्थानांतरण की सूचना मिलते ही संभल जिला न्यायालय में अधिवक्ताओं में नाराजगी फैल गई. मंगलवार को आदेश जारी होने के बाद बुधवार को वकीलों ने न्यायालय परिसर में एकत्र होकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की.
प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने कहा कि सीजेएम विभांशु सुधीर अपने छोटे से कार्यकाल में सक्रिय, पारदर्शी और निष्पक्ष न्यायिक अधिकारी के रूप में सामने आए थे. उनके कई फैसलों से लंबित मामलों में तेजी आई. अधिवक्ताओं का मानना है कि ऐसे अधिकारी का तबादला गलत संदेश देता है और इससे न्यायिक कार्यप्रणाली प्रभावित होती है.
वकीलों ने स्थानांतरण से जुड़ी मीडिया कवरेज पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि तथ्यों को अधूरा या तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया. अधिवक्ताओं ने मांग की कि पूरे घटनाक्रम को निष्पक्ष रूप से सामने रखा जाए. उनका तर्क है कि यह केवल एक प्रशासनिक तबादला नहीं, बल्कि न्यायिक स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर विषय है.
हाईकोर्ट के आदेश के तहत विभांशु सुधीर के स्थान पर सिविल जज वरिष्ठ श्रेणी आदित्य सिंह को चंदौसी का नया सीजेएम नियुक्त किया गया है. इसी क्रम में सीतापुर के सीजेएम राजेंद्र कुमार सिंह को कन्नौज स्थानांतरित किया गया है. इस प्रशासनिक फेरबदल में समान स्तर के आठ अन्य न्यायिक अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में भी बदलाव किया गया है.
गौरतलब है कि एक सप्ताह पहले ही शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद से जुड़े सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मामले में सीजेएम विभांशु सुधीर ने बड़ा आदेश दिया था. उन्होंने तत्कालीन सीओ और वर्तमान एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे. यह आदेश गोली लगने से घायल युवक के पिता की याचिका पर सुनवाई के बाद जारी हुआ था.
सीजेएम विभांशु सुधीर का संभल में कार्यकाल मात्र तीन महीने का रहा, लेकिन इस छोटे समय में उनके फैसले चर्चा का विषय बन गए. अब उनके तबादले के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या संवेदनशील मामलों में सख्त आदेश देने वाले न्यायिक अधिकारियों को पर्याप्त संरक्षण मिल पा रहा है.