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India Daily

स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता पर सख्त हुआ नियामक आयोग, बिजली कंपनियों से मांगी जांच रिपोर्ट

प्रदेश में लगे करीब 90 लाख स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच नियामक आयोग ने सभी बिजली कंपनियों से गुणवत्ता परीक्षण और चेक मीटर जांच की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है.

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Edited By: Shanu Sharma
स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता पर सख्त हुआ नियामक आयोग, बिजली कंपनियों से मांगी जांच रिपोर्ट
Courtesy: AI

प्रदेश में स्मार्ट मीटरों को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों के प्रति सख्त रुख अपनाया है. स्मार्ट मीटरों के तेज चलने और गलत बिलिंग की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने सभी विद्युत वितरण कंपनियों से गुणवत्ता परीक्षण और चेक मीटरों की जांच की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. 

आयोग के इस कदम से लाखों बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. प्रदेश में वर्तमान समय में लगभग 90 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. इनमें से नियमानुसार करीब पांच प्रतिशत मीटरों को चेक मीटर के रूप में सुरक्षित रखा जाना था, ताकि समय-समय पर उनकी सटीकता और गुणवत्ता की जांच की जा सके. अब आयोग ने इन्हीं चेक मीटरों के परीक्षण की रिपोर्ट तलब कर स्मार्ट मीटर व्यवस्था की विश्वसनीयता की समीक्षा शुरू कर दी है.

स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता पर उठे सवाल

बिजली दरों से संबंधित सुनवाई के दौरान राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद और अनेक उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे. खासतौर पर प्रीपेड स्मार्ट मीटरों के दौरान तेज बिल आने और मीटरों की गति अधिक होने की शिकायतें लगातार सामने आई थीं. बाद में इन मीटरों को पोस्टपेड व्यवस्था में परिवर्तित कर दिया गया, लेकिन उपभोक्ताओं की शिकायतों में कोई विशेष कमी नहीं आई.

इसी को देखते हुए आयोग ने सभी बिजली कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए चेक मीटरों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल राज्य स्तर की रिपोर्ट पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि प्रत्येक जिले के आधार पर अलग-अलग एक्यूरेसी टेस्ट और गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके.

छोटे दुकानदारों को मिल सकती है राहत

बिजली दरों की सुनवाई के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में घरों के भीतर छोटी दुकान संचालित करने वाले उपभोक्ताओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया. वर्तमान व्यवस्था में ऐसे उपभोक्ताओं को दुकान के लिए घरेलू बिजली उपयोग की अनुमति नहीं है, जिसके कारण कई मामलों में बिजली चोरी के आरोप लगाकर कार्रवाई तक की जाती है.

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि इससे प्रदेश के लगभग 35 से 40 लाख उपभोक्ता प्रभावित होते हैं. आयोग ने इस विषय पर पावर कॉरपोरेशन को तीन माह के भीतर विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. प्रस्ताव मिलने के बाद इस वर्ग के उपभोक्ताओं को स्थायी राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है.