रायबरेली के महराजगंज तहसील परिसर में शनिवार को एक बुजुर्ग महिला न्याय की उम्मीद लेकर आमरण अनशन पर बैठ गई. उनका आरोप है कि पति की मृत्यु के बाद सौतेले बेटे ने उन्हें घर और संपत्ति से अलग कर दिया. कई शिकायतों के बावजूद समाधान न मिलने पर उन्होंने यह कदम उठाया.
महराजगंज तिराहे के आर्य नगर निवासी स्वर्गीय हनुमान गुप्ता किराना कारोबार से जुड़े थे. वर्ष 2005 में उनकी पहली पत्नी कृष्णा देवी का निधन हो गया था. इसके बाद वर्ष 2007 में उन्होंने ज्ञानवती से विवाह किया. वर्ष 2020 में हनुमान गुप्ता के निधन के बाद परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया. ज्ञानवती का कहना है कि पति की मृत्यु के बाद उनके जीवन में लगातार कठिनाइयां बढ़ती चली गईं और उन्हें परिवार में सम्मानजनक स्थान भी नहीं मिला.
ज्ञानवती ने आरोप लगाया कि उनके सौतेले बेटे अनिल ने पति की चल और अचल संपत्ति अपने नाम दर्ज करा ली. उनका कहना है कि अब उन्हें घर में रहने की अनुमति नहीं दी जा रही है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं. कई बार समझौते और बातचीत की कोशिश करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, जिससे उनके सामने रोजमर्रा के जीवन का संकट खड़ा हो गया.
महिला का कहना है कि उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से लेकर जिलाधिकारी तक कई बार अपनी शिकायत पहुंचाई, लेकिन किसी स्तर पर उन्हें राहत नहीं मिली. लगातार निराशा मिलने के बाद उन्होंने शनिवार को महराजगंज तहसील पहुंचकर उपजिलाधिकारी कार्यालय के बाहर आमरण अनशन शुरू कर दिया. उनका कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक वह अपना आंदोलन जारी रखेंगी.
मामले पर उपजिलाधिकारी चंद्र प्रकाश गौतम ने कहा कि महिला की शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा. उन्होंने बताया कि पीड़िता से बातचीत कर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी. जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी, ताकि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो उचित न्याय सुनिश्चित किया जा सके.