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पीलीभीत के चपरासी ने उड़ाए 8 करोड़! तीन पत्नियां, कई गर्लफ्रेंड्स... लूटा सरकारी खजाना

शिक्षा विभाग के DIOS कार्यालय से जुड़ा एक मामला सामने आ रहा है जिसमें चपरासी इल्हाम उर रहमान शम्सी पर करीब 8 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है. जांच में सामने आया कि उसने सरकारी फंड को फर्जी खातों के जरिए अपने और अपने करीबियों के पास ट्रांसफर किया.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
पीलीभीत के चपरासी ने उड़ाए 8 करोड़! तीन पत्नियां, कई गर्लफ्रेंड्स... लूटा सरकारी खजाना
Courtesy: X (@jpsin1)

पीलीभीत: कहते हैं इंसान प्यार में कुछ भी कर गुजरता है. प्यार में इतनी ताकत होती है कि इसमें पड़े इंसान को कुछ नहीं दिखता है. ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से सामने आ रहा है. यहां एक साधारण चपरासी ने अपने शौक और रिश्तों को पूरा करने के लिए सरकारी खजाने को ही निशाना बना डाला. आलीशान जिंदगी, कई रिश्ते और करोड़ों की हेराफेरी ने सबको चकित कर दिया. 

यह मामला शिक्षा विभाग के DIOS कार्यालय से जुड़ा है, जहां तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इल्हाम उर रहमान शम्सी पर करीब 8 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है. जांच में सामने आया कि उसने सरकारी फंड को फर्जी खातों के जरिए अपने और अपने करीबियों के पास ट्रांसफर किया. लंबे समय से चल रही इस धांधली का खुलासा होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है.

फर्जी खातों का जाल

बता दें इल्हाम ने ट्रेजरी सिस्टम की जानकारी का फायदा उठाते हुए कई फर्जी बेनेफिशियरी आईडी तैयार कीं. इन आईडी के जरिए उसने 53 संदिग्ध खातों में 98 बार ट्रांजेक्शन कर करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए. यह पूरा खेल बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, जिससे लंबे समय तक किसी को शक नहीं हुआ.

रिश्तों पर खर्च हुआ सरकारी पैसा

जांच में यह भी सामने आया कि उसने अपनी पत्नियों और प्रेमिकाओं पर जमकर पैसा लुटाया और इल्हाम की एक नहीं दो नहीं बल्कि तीन-तीन पत्नियां हैं. इतना ही नहीं बल्कि उसकी कई गर्लफ्रेंड्स भी है जिन पर जमकर पैसे लुटाता था. उसकी एक पत्नी के खाते में ही एक करोड़ रुपये से अधिक ट्रांसफर किए गए. बाकी रकम से महंगे फ्लैट, जमीन और लग्जरी लाइफस्टाइल पर खर्च किया गया.

जांच में जुटी पुलिस

मामले के उजागर होते ही पुलिस ने सात महिलाओं को गिरफ्तार किया, जो इस नेटवर्क का हिस्सा बताई जा रही हैं. इनमें कई नाम शामिल हैं जो आरोपी के करीबी संबंधों से जुड़े थे. इसके अलावा, करीब 5.5 करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज कर दिया गया है.

सिस्टम पर उठ रहे सवाल

यह मामला केवल एक व्यक्ति की करतूत नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों को भी उजागर करता है. एक चपरासी का इतने बड़े घोटाले को अंजाम देना यह दिखाता है कि निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था में गंभीर कमी थी. 

फिलहाल पुलिस मामले की जांच  कर रही है. साथ ही यह पता लगाने में जुटी हुई है कि इल्हाम के साथ इस साजिश में और कौन-कौन शामिल था. अधिकारियों का कहना है कि सरकारी धन की पूरी वसूली की जाएगी और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी.