यूपी: अब बरेली से दिल्ली, लखनऊ, देहरादून और हरिद्वार जाने वाली रोडवेज बसों में सफर महंगा हो गया है. टोल कंपनियों द्वारा टोल दरें बढ़ाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने भी बसों के किराए में बढ़ोतरी कर दी है. नया किराया आज यानी 8 अप्रैल 2026 की रात 12 बजे से लागू हो गया है.
परिवहन निगम अधिकारियों के अनुसार एक अप्रैल 2026 से टोल एजेंसियों ने टोल टैक्स बढ़ा दिया था. इसके चलते बसों का परिचालन खर्च बढ़ गया. मुख्यालय के निर्देश पर क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक चौधरी के नेतृत्व में एआरएम और फाइनेंस अधिकारियों की बैठक में किराया बढ़ाने का फैसला लिया गया. नए किराए में सिर्फ एक से तीन रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है. हालांकि छोटी राशि होने के बावजूद यात्रियों को इसका सीधा असर महसूस हो रहा है.
हल्द्वानी: 168 रुपये से बढ़कर 169 रुपये
बहेड़ी: 85 रुपये से बढ़कर 86 रुपये
देहरादून: 514 रुपये से बढ़कर 515 रुपये
हरिद्वार: 396 रुपये से बढ़कर 397 रुपये
मुरादाबाद: 154 रुपये से बढ़कर 155 रुपये
आनंद विहार (दिल्ली): 436 रुपये से बढ़कर 439 रुपये
लखनऊ: 385 रुपये से बढ़कर 387 रुपये
क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक चौधरी ने बताया- 'टोल कंपनियों द्वारा एक अप्रैल से टोल दरें बढ़ाए जाने के कारण बसों का किराया भी समायोजित करना पड़ा. यह बढ़ोतरी न्यूनतम रखी गई है ताकि यात्रियों पर ज्यादा बोझ न पड़े.'
इसी बीच परिवहन निगम ने लोकल और मध्यम दूरी की बस सेवाओं को मजबूत करने का फैसला लिया है. बरेली रीजन को 70 नई छोटी बसों की मंजूरी मिल गई है. इनमें से 57 बसें दो चरणों में पहले ही आ चुकी हैं और विभिन्न रूटों पर चलाई जा रही हैं. बाकी बसें मई-जून 2026 तक पहुंचने वाली हैं. ये नई बसें 28 सीटर हैं. परिवहन निगम पुरानी और 15 साल से ज्यादा पुरानी बसों को बेड़े से बाहर करने की योजना बना रहा है. उनकी जगह इन नई छोटी बसों को लगाया जाएगा.
नई बसों को मुख्य रूप से बरेली-मुरादाबाद, रामपुर, शाहजहांपुर, पीलीभीत, बदायूं और हल्द्वानी जैसे रूटों पर चलाने की योजना है. परिवहन निगम का लक्ष्य इन रूटों पर 24 घंटे बस सेवा उपलब्ध कराना है. क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक चौधरी ने कहा कि दो महीने पहले उन्होंने और अन्य अधिकारियों ने नई बसों के प्रस्ताव मुख्यालय भेजे थे, जिन्हें अब मंजूरी मिल गई है. इससे यात्रियों को बेहतर और ज्यादा बस सेवाएं मिल सकेंगी. यात्रियों का कहना है कि टोल बढ़ने से किराया बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि बसों की संख्या और सुविधा भी साथ-साथ बढ़ेगी.