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India Daily

यूपी में 28 गिद्धों की तड़प-तड़प कर मौत, इंसानी लापरवाही ने ढाया कहर; क्या है पूरा मामला?

भीरा वन रेंज में जहरखुरानी और लापरवाही के चलते 28 गिद्धों की दर्दनाक मौत हो गई. जहरीले कुत्ते का मांस खाने से हुए इस हादसे ने वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

KanhaiyaaZee
यूपी में 28 गिद्धों की तड़प-तड़प कर मौत, इंसानी लापरवाही ने ढाया कहर; क्या है पूरा मामला?
Courtesy: Social Media

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के भीरा वन रेंज अंतर्गत पड़रिया बीट क्षेत्र में प्रकृति के संतुलन पर एक भीषण हमला हुआ है. सेमरिया गांव के पास एक खेत में जहर के कारण 28 गिद्धों ने तड़प-तड़प कर अपनी जान गंवा दी. ये पक्षी, जिन्हें अक्सर 'प्रकृति का सफाईकर्मी' कहा जाता है, इंसानी क्रूरता और विभाग की सुस्ती का शिकार बन गए. इस हृदयविदारक घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के दावों की जमीनी हकीकत भी बयां कर दी है.

सेमरिया गांव के पास एक किसान के खेत में सुबह का नजारा कौतूहल भरा था. वहां करीब 40 गिद्धों का एक बड़ा झुंड एक मृत कुत्ते के शव को खाता हुआ दिखाई दिया. कई प्रकृति प्रेमी इस दुर्लभ दृश्य को अपने कैमरों में कैद करने के लिए उत्साहित थे. लेकिन कुछ ही पलों में यह उत्साह चीख-पुकार में बदल गया. गिद्ध अचानक लड़खड़ाने लगे और एक-एक कर जमीन पर गिरने लगे. देखते ही देखते पूरा खेत तड़पते हुए पक्षियों से भर गया और मंजर भयावह हो गया.

इंसानी क्रूरता और जहरखुरानी का सच 

इस दर्दनाक घटना की जड़ें पास के एक गांव में छिपी थीं. जांच के दौरान यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि ग्रामीणों ने आवारा कुत्तों को मारने के लिए उन्हें जहर दे दिया था. उन्हीं में से एक जहरीला कुत्ता भागते हुए इस खेत में आकर मर गया. जब गिद्धों ने उस जहरीले शव को अपना आहार बनाया, तो जहर उनके शरीर में फैल गया. नतीजा यह हुआ कि 40 के झुंड में से 28 गिद्धों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाकी अब भी जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

पारिस्थितिकी तंत्र पर गहरा आघात 

गिद्ध पर्यावरण को साफ रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. वे मृत जानवरों के अवशेषों को खाकर महामारियों को फैलने से रोकते हैं. एक साथ इतनी बड़ी संख्या में गिद्धों का मरना इस क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है. वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में गिद्धों की संख्या पहले से ही चिंताजनक रूप से कम है. ऐसे में इंसानी लापरवाही के कारण एक ही झटके में इतने सारे पक्षियों का खत्म होना किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है.

वन विभाग की सुस्ती पर आक्रोश 

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है. ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना मिलने के बाद भी वन विभाग की टीम मौके पर बहुत देर से पहुंची. यदि विभाग ने तत्परता दिखाई होती और गिद्धों को समय रहते चिकित्सा सहायता मिल जाती, तो शायद कई और पक्षियों की जान बचाई जा सकती थी. प्रकृति प्रेमियों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण ही आज इन बेजुबान जीवों को इस तरह मौत का सामना करना पड़ा है.