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यूपी सरकार का बड़ा फैसला, आयुष सेक्टर को मिलेगी बड़ी ताकत; 23 नई मेडिकल यूनिट और AI कोर्स की सौगात

उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुष क्षेत्र के विस्तार के लिए 23 नई आयुष मेडिकल यूनिट स्थापित करने और 17 आयुष कॉलेजों में AI पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है.

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Km Jaya

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुष चिकित्सा सेवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए कई बड़े फैसले किए हैं. प्रदेश में 23 नई आयुष मेडिकल यूनिट स्थापित की जाएंगी, जबकि 17 आयुष कॉलेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे. इसके साथ ही 51 स्मार्ट क्लासरूम भी बनाए जाएंगे, जिन पर लगभग 3.03 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

यह निर्णय मुख्य सचिव एस. पी. गोयल की अध्यक्षता में हुई राष्ट्रीय आयुष मिशन की गवर्निंग बॉडी की बैठक में लिया गया. बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए 613.42 करोड़ रुपये की कार्ययोजना को मंजूरी दी गई. इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय आयुष मंत्रालय को भेजा जाएगा.

क्या है सरकार का उद्देश्य?

स्वीकृत कार्ययोजना के अनुसार कुल 613.42 करोड़ रुपये में से 458.99 करोड़ रुपये नई योजनाओं और गतिविधियों पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 154.42 करोड़ रुपये पहले से चल रही योजनाओं को आगे बढ़ाने में लगाए जाएंगे. सरकार का उद्देश्य आयुष सेवाओं का विस्तार करने के साथ चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाना है.


बैठक में मुख्य सचिव ने राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों के साथ-साथ आवश्यक पदों के सृजन की प्रक्रिया भी समय पर पूरी की जाए, ताकि संस्थानों को जल्द शुरू किया जा सके.

क्या-क्या है प्लानिंग?

योजना के तहत वाराणसी स्थित आयुर्वेद कॉलेज में लगभग 1.78 करोड़ रुपये की लागत से छात्राओं के लिए नया छात्रावास बनाया जाएगा. इसके अलावा झांसी और शाहजहांपुर में नए होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और आयुष डिस्पेंसरी भी स्थापित की जाएंगी.

प्रमुख सचिव ने क्या बताया?

प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने बताया कि लखीमपुर खीरी में संचालित पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के तहत वर्ष 2025-26 में 2,12,435 मरीजों की स्क्रीनिंग, परामर्श और रेफरल सेवाएं प्रदान की गईं. वहीं आयुष मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से बहराइच, बलरामपुर, चंदौली, चित्रकूट, फतेहपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, सोनभद्र और कुशीनगर जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं.

सरकार ने ऑस्टियोआर्थराइटिस और अन्य मस्कुलोस्केलेटल रोगों के उपचार की सुविधाओं को भी मजबूत करने का फैसला किया है. लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, झांसी, पीलीभीत, बरेली, मुजफ्फरनगर और अतर्रा के आयुर्वेद कॉलेजों में इन सेवाओं का विस्तार किया जाएगा. साथ ही "कारुण्य" कार्यक्रम के तहत राज्य के 55 विकासखंडों में घर-घर जाकर जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मरीजों को देखभाल और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती रहेंगी.