North Eastern Railway: पूर्वोत्तर रेलवे के लाखों यात्रियों के लिए एक बड़ी खबर आई है. गोरखपुर, लखनऊ, बनारस जैसे व्यस्त स्टेशनों पर आग से बचाव की तैयारियों की अब गहन जांच होने वाली है. रेलवे बोर्ड ने सख्ती बरतते हुए 20 प्रमुख स्टेशनों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का फैसला लिया है. यह महाअभियान यात्रियों की जान-माल की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है. छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है, इसलिए रेलवे अब हर पहलू पर नजर रखना चाहता है.
सेफ्टी ऑडिट में स्टेशन परिसर के हर कोने की समीक्षा होगी. भवनों से लेकर विद्युत प्रतिष्ठानों, एयर कंडीशनिंग सिस्टम, आपात निकास मार्गों और अग्निशमन उपकरणों तक सबकी जांच की जाएगी. विशेषज्ञ देखेंगे कि आग लगने पर तुरंत क्या-क्या किया जा सकता है. कमियां मिलने पर उन्हें जल्द सुधारने के निर्देश दिए जाएंगे.
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि स्टेशनों पर राष्ट्रीय भवन संहिता, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के नियम-2023 और भारतीय मानक कोड का पूरा पालन हो. जल भंडारण, पंपिंग, स्प्रिंकलर सिस्टम की कार्यक्षमता भी परखी जाएगी. जरूरत पड़ी तो प्रतिष्ठित एजेंसियों और राज्य अग्निशमन विभाग की मदद ली जाएगी.
गोरखपुर जंक्शन देश के 28 प्रथम श्रेणी स्टेशनों में शामिल होकर NSG-1 श्रेणी में आ गया है. पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ, बनारस, छपरा, मऊ सहित कुल 20 स्टेशन इस ऑडिट के दायरे में हैं. रेलवे के करीब 500 स्टेशनों में विभिन्न NSG श्रेणियों में वर्गीकरण किया गया है.
ट्रेनों में आग लगने पर टीटीई अब सिर्फ टिकट चेकिंग तक सीमित नहीं रहेंगे. वे राहतकर्मी की भूमिका निभाएंगे, यात्रियों को घबराहट से बचाएंगे और सुरक्षित जगह पहुंचाएंगे. साथ ही बेस स्टेशनों पर आग से बचाव की विशेष कार्यशालाएं भी चलाई जाएंगी ताकि स्टाफ तैयार रहे.