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India Daily

श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन से नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांटों में पसरा सन्नाटा, प्रोडक्शन बुरी तरह प्रभावित

नोएडा के फेज-2 औद्योगिक क्षेत्र में वेतन विसंगतियों को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन हिंसक झड़पों और पथराव में तब्दील हो गया. इससे डिक्सन, ओप्पो और सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियों के उत्पादन पर गहरा असर पड़ा है और भविष्य के निवेश पर संकट खड़ा हो गया है.

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श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन से नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांटों में पसरा सन्नाटा, प्रोडक्शन बुरी तरह प्रभावित
Courtesy: Social Media

नोएडा: भारत के सबसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों में से एक, नोएडा-ग्रेटर नोएडा बेल्ट इस समय गंभीर अशांति के दौर से गुजर रहा है. वेतन में भेदभाव को लेकर शुरू हुआ श्रमिकों का गुस्सा अब सड़कों पर हिंसक झड़पों के रूप में दिखाई दे रहा है. इस अशांति ने न केवल वर्तमान उत्पादन को प्रभावित किया है, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की उस महत्वाकांक्षी छवि को भी चोट पहुंचाई है, जिसके तहत इस क्षेत्र को ग्लोबल कंपोनेंट हब बनाने की तैयारी चल रही है.

नोएडा का यह क्षेत्र डिक्सन टेक्नोलॉजीज, ऑप्टिमस इलेक्ट्रॉनिक्स, लावा इंटरनेशनल, ओप्पो, वीवो और सैमसंग जैसी वैश्विक कंपनियों का गढ़ माना जाता है. यहां ये कंपनियां बड़े पैमाने पर स्मार्टफोन और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्माण करती हैं. इन मुख्य कंपनियों के साथ-साथ उनके कई कंपोनेंट सप्लायर्स भी इसी इलाके में स्थित हैं. वर्तमान व्यवधान की वजह से इस पूरी सप्लाई चेन में देरी होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे मोबाइल बाजार में स्टॉक की कमी हो सकती है.

शांतिपूर्ण मार्च से पथराव और अफरा-तफरी तक 

घटना की शुरुआत नोएडा के फेज-2 औद्योगिक क्षेत्र से हुई, जहां कई प्रमुख फैक्ट्रियां स्थित हैं. शुरुआत में यह विरोध प्रदर्शन वेतन में असमानता को लेकर एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन भीड़ बढ़ते ही स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई. प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और प्रमुख रास्तों को जाम कर दिया. चश्मदीदों के मुताबिक, देखते ही देखते स्थिति बिगड़ गई और कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया, जिससे वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा. पुलिस ने भारी बल के साथ मोर्चा संभाला, लेकिन तब तक कई औद्योगिक पॉकेट्स में दहशत फैल चुकी थी.

निवेशकों के विश्वास पर मंडराते काले बादल 

'मनीकंट्रोल' की रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के अधिकारियों ने चिंता जताई है कि नोएडा में श्रम की उपलब्धता तो भरपूर है, लेकिन ऐसी कानून-व्यवस्था की चुनौतियां निवेशकों के भरोसे को तोड़ सकती हैं. उद्योग जगत के नेताओं का मानना है कि इस तरह की अशांति से उन नए निवेशकों के मन में शंका पैदा होगी जो यहां विस्तार करने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने अधिकारियों से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुरक्षा उपाय करने की अपील की है.

यूपी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं दांव पर 

राज्य सरकार लगातार इस क्षेत्र को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स और सेमीकंडक्टर पैकेजिंग के केंद्र के रूप में पेश कर रही है. घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए यह क्षेत्र रीढ़ की हड्डी जैसा है. हालांकि, इस तरह के अचानक भड़कने वाले दंगों और हड़तालों से औद्योगिक स्थिरता को बड़ा झटका लगा है. अगर प्रशासन ने जल्द ही कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो भारत के सबसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स हब की प्रतिष्ठा धूमिल हो सकती है.