उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार की शाम एक बड़ी दर्दनाक घटना सामने आई. विकास नगर सेक्टर 14 में रिंग रोड के किनारे खाली प्लाट में बनी लगभग पांच सौ झोपड़ियों में अचानक आग लग गई. हालात इतने भयानक थे कि करीब दस किलोमीटर दूर से धुआं उठता देखा गया. आग के साथ-साथ एक के बाद एक कई गैस सिलिंडरों में जोरदार विस्फोट हुए, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई. लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया. आग में कई बच्चों के लापता होने की सूचना मिली है.
आग की सूचना शाम 5:47 बजे मिली. मुख्य अग्निशमन अधिकारी अंकुश मित्तल ने बताया कि तुरंत इंदिरानगर, गोमती नगर, हजरतगंज सहित कई थानों से 20 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं. हालांकि रिंग रोड पर लगे जाम के कारण कई गाड़ियां फंस गईं, जिन्हें निकालने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी. आग बुझाने में करीब तीन घंटे लग गए. एहतियात के तौर पर पूरे इलाके की बिजली काट दी गई. आसपास के लगभग 50 मकानों को खाली कराया गया. डीजी फायर सुजीत पांडेय, डीसीपी पूर्वी दीक्षा शर्मा भी मौके पर पहुंचे. राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम करीब तीन घंटे बाद पहुंची.
लखनऊ में गर्मी का मौसम शुरू होते ही आग लगने का सिलसिला शुरू।विकास नगर थाना क्षेत्र सेक्टर 14 में लगी भीषण आग. क्षेत्र के जुग्गी झोपड़ियों में लगी भीषण आग का विकराल रूप देखकर मचा हड़कंप।फायर ब्रिगेड की गई गाड़िया मौके पर पहुंची। शजवान आग पर काबू करने का कर रहे प्रयास।मौके पर… pic.twitter.com/BkjRLhOhDP
— Tushar Rai (@tusharcrai) April 15, 2026
पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस और दमकल विभाग काफी देर से मौके पर पहुंचे. कई लोगों की पुलिस से झड़प भी हुई. भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने पत्थर चलाए, जिसमें लोहिया नगर में सिविल डिफेंस के पोस्ट वार्डन ऋषि श्रीवास्तव के सिर में गंभीर चोट आई. आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सबसे पहले एक झोपड़ी में विस्फोट हुआ और फिर देखते ही देखते आग ने चारों तरफ फैलना शुरू कर दिया.
इस भीषण आग में सबसे दर्दनाक पहलू कई बच्चों का लापता होना है. सीतापुर निवासी रहमान ने बताया कि उनके चार बच्चे थे, घटना के समय सब सो रहे थे. वह तो किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन दो बच्चे अंदर ही फंस गए हैं. बाराबंकी के बड्डूपुर निवासी सकटू की आंखों में आंसू थे- उनकी केवल पंद्रह दिन की बेटी भी आग में फंस गई और उसका कोई पता नहीं है. एक अन्य पीड़ित विपिन ने बताया कि उनके रिश्तेदार के दो बच्चे अब भी लापता हैं. इन झोपड़ियों में लगभग दो हजार लोग रहते थे. अब उनके पास सिर्फ राख का ढेर बचा है.