लखनऊ अग्निकांड में बड़ा एक्शन... 14 दिन की न्यायिक हिरासत में मुख्य आरोपी वीरेंद्र शुक्ला, किया बीमारी का नाटक
पुलिस ने लखनऊ अग्निकांड से जुड़े मुख्य आरोपी और बिल्डिंग के मालिक वीरेंद्र शुक्ला को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया. आरोप है कि जिस इमारत में यह हादसा हुआ, उसका उपयोग स्वीकृत मानकों के विपरीत किया जा रहा था.
लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था. इस हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद प्रशासन और पुलिस पर त्वरित कार्यवाही का दबाव बढ़ गया था. अब इस मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्यवाही करते हुए बिल्डिंग मालिक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि अवैध निर्माण के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने की तैयारी शुरू हो गई है.
पुलिस ने अग्निकांड से जुड़े मुख्य आरोपी और बिल्डिंग के मालिक वीरेंद्र शुक्ला को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया. आरोप है कि जिस इमारत में यह हादसा हुआ, उसका उपयोग स्वीकृत मानकों के विपरीत किया जा रहा था. मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आरोपी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया.
गिरफ्तारी के बाद बीमारी का किया नाटक
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद वीरेंद्र शुक्ला ने अचानक सीने में दर्द की शिकायत की. उन्होंने खुद को गंभीर हृदय रोगी बताते हुए स्वास्थ्य संबंधी समस्या का हवाला दिया. इसके बाद एहतियात के तौर पर उन्हें जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया. जहां उसे पूरी तरह से ठीक बताया गया.
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डॉक्टरों की रिपोर्ट में निकले स्वस्थ
हॉस्पिटल में डॉक्टरों द्वारा जांच किए जाने के बाद आरोपी को पूरी तरह स्वस्थ बताया गया. मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने उन्हें अदालत में पेश किया, जहां न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद जेल भेजने का फैसला सुनाया गया.
अन्य आरोपियों पर भी कार्यवाही जारी
इस मामले में पुलिस की जांच लगातार जारी है. अधिकारियों के मुताबिक, वीरेंद्र शुक्ला के अलावा अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. इससे पहले पुलिस तीन अन्य नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और मामले से जुड़े सभी तथ्यों को खंगाला जा रहा है.
अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्यवाही की तैयारी
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने संबंधित भवन मालिकों को नोटिस जारी किया है. जांच में सामने आया है कि साल 2014 में जिस नक्शे को आवासीय भवन के रूप में मंजूरी मिली थी, उसका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था. अधिकारियों ने 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर इमारत के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जा सकती है.