टिहरी झील के चारों ओर बनेगा आधुनिक रिंग रोड नेटवर्क, चार विशाल पुल बदलेंगे पर्यटन की तस्वीर
उत्तराखंड की प्रसिद्ध टिहरी झील के चारों ओर आधुनिक रिंग रोड विकसित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चार बड़े और अत्याधुनिक पुलों का निर्माण किया जाएगा, जिससे पर्यटन को नई उड़ान मिलेगी.
उत्तराखंड की प्रसिद्ध टिहरी झील जल्द ही एक नए विकास अध्याय की साक्षी बनने जा रही है. राज्य सरकार झील के चारों ओर आधुनिक रिंग रोड विकसित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चार बड़े और अत्याधुनिक पुलों का निर्माण किया जाएगा, जिससे न केवल पर्यटन को नई उड़ान मिलेगी बल्कि आसपास के सैकड़ों गांवों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी. यह परियोजना टिहरी को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. लोक निर्माण विभाग के आठवें वृत्त, नई टिहरी ने कंसल्टेंट्स से रुचि अभिव्यक्ति (EOI) आमंत्रित की है. डीपीआर तैयार करने की समयसीमा लगभग चार महीने तय की गई है, जबकि कंसल्टेंसी कार्य की अनुमानित लागत 10 से 12 करोड़ रुपये रखी गई है.
विश्वस्तरीय तकनीक से तैयार होंगे पुल
प्रस्तावित पुलों को आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप डिजाइन किया जाएगा. इनमें केबल स्टेड, सस्पेंशन और आर्च ब्रिज जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा. हिमालयी क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए इन संरचनाओं को भूकंपरोधी बनाया जाएगा. साथ ही पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा.
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पर्यटन और स्थानीय विकास को मिलेगा बढ़ावा
करीब 42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली टिहरी झील के आसपास यह परियोजना 173 गांवों के लगभग 84 हजार लोगों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाएगी. बेहतर सड़क संपर्क से स्थानीय लोगों की आवाजाही आसान होगी, जबकि जल क्रीड़ा, एडवेंचर टूरिज्म और अन्य पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी. इसके अलावा चारधाम यात्रा के लिए एक वैकल्पिक मार्ग विकसित होने से यातायात व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
चार प्रमुख पुलों का होगा निर्माण
पिपलडाली पुल: लगभग 450 मीटर लंबा आधुनिक तीन लेन पुल बनाया जाएगा, जबकि पुराने पुल को भी सुरक्षित रखा जाएगा.
डोबरा चांठी पुल: करीब 500 मीटर लंबा यह पुल झील के दोनों किनारों को बेहतर तरीके से जोड़ेगा और आवागमन को सुगम बनाएगा.
हढ़िकखाला पुल: 150 मीटर लंबे इस तीन लेन पुल से स्थानीय गांव सीधे रिंग रोड नेटवर्क से जुड़ सकेंगे.
कोटी पुल: लगभग 370 मीटर लंबा यह पुल पर्यटन सर्किट का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा और आसपास के क्षेत्रों को बेहतर संपर्क उपलब्ध कराएगा.
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल सड़क और पुल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि टिहरी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, पर्यटन उद्योग और रोजगार के अवसरों को भी नई दिशा दे सकती है. परियोजना पूरी होने के बाद टिहरी झील क्षेत्र उत्तराखंड के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है.