अब चालान भरकर नहीं बचेंगे! पंजाब में ट्रैफिक नियम तोड़ा तो सीधे कोर्ट के चक्कर लगेंगे; जानें नियम

पंजाब सरकार ने ट्रैफिक नियमों को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है. रेड लाइट जंप करने, गलत दिशा में वाहन चलाने, नशे में ड्राइविंग और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने जैसे मामलों को अब नॉन-कंपाउंडेबल अपराध घोषित कर दिया गया है.

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Reepu Kumari

पंजाब की सड़कों पर लापरवाही से वाहन चलाने वालों के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. राज्य सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए कुछ गंभीर ट्रैफिक उल्लंघनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ कर दिया है. इस फैसले का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और लोगों में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाना है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई ऐसे अपराध, जिन्हें पहले चालान भरकर निपटाया जा सकता था, अब सीधे कानूनी कार्रवाई के दायरे में आएंगे. सरकार का मानना है कि कठोर नियमों से सड़कों पर अनुशासन बढ़ेगा और आम लोगों की सुरक्षा बेहतर होगी.

17 जून की अधिसूचना से बदले नियम

परिवहन विभाग की ओर से 17 जून 2026 को जारी अधिसूचना में कई अहम बदलाव किए गए हैं. इसके तहत कुछ गंभीर ट्रैफिक उल्लंघनों को नॉन-कंपाउंडेबल श्रेणी में रखा गया है. इसका अर्थ है कि ऐसे मामलों का निपटारा केवल जुर्माना भरकर नहीं किया जा सकेगा और दोषियों को कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा.

खतरनाक ड्राइविंग पर विशेष फोकस

मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 184 के तहत आने वाले मामलों को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है. यदि कोई चालक रेड लाइट पार करता है, ट्रैफिक संकेतों की अनदेखी करता है या ऐसा वाहन चलाता है जिससे दूसरों की जान जोखिम में पड़ती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. सरकार इसे सड़क सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा मान रही है.


नशे में ड्राइविंग पर जीरो टॉलरेंस

राज्य सरकार ने शराब या नशीले पदार्थों के प्रभाव में वाहन चलाने के मामलों को लेकर भी सख्त नीति अपनाई है. धारा 185 के तहत ऐसे मामलों में अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी. प्रशासन का मानना है कि नशे में वाहन चलाना न केवल चालक बल्कि सड़क पर मौजूद अन्य लोगों की जान के लिए भी खतरा बनता है.

नाबालिग ड्राइविंग पर अभिभावकों की जिम्मेदारी

नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के मामलों में भी सरकार ने कड़ा रुख दिखाया है. धारा 199ए के तहत ऐसे मामलों में अभिभावकों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है. यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके परिवार को भी कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है. यह कदम बच्चों की सुरक्षा और जिम्मेदार अभिभावकत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है.

सड़क हादसों पर लगाम लगाने की कोशिश

परिवहन विभाग का कहना है कि राज्य में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और लापरवाह ड्राइविंग की घटनाओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. सरकार को उम्मीद है कि सख्त नियमों और कानूनी कार्रवाई के डर से लोग ट्रैफिक नियमों का बेहतर पालन करेंगे. इससे सड़क सुरक्षा में सुधार होगा और दुर्घटनाओं की संख्या कम करने में मदद मिलेगी.