अयोध्या: अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर में मंगलवार को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण देखने को मिला, जब भगवान लक्ष्मण को समर्पित शेषावतार मंदिर पर धर्म ध्वजा का आरोहण किया गया. इसके साथ ही रामजन्मभूमि परिसर के सभी सात पूरक मंदिरों पर धर्म ध्वजा फहराने की प्रक्रिया पूरी हो गई.
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आमंत्रण पर रामनगरी के 11 साधु-संतों ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ शेषावतार मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा स्थापित की. इस अवसर पर अयोध्या महानगर और ग्रामीण क्षेत्रों से आए लगभग चार हजार श्रद्धालु इस अविस्मरणीय पल के साक्षी बने.
ध्वजारोहण समारोह शेषावतार मंदिर के सामने आयोजित किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत लखनऊ में हाल ही में हुई दुखद अग्नि दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई. संतों और श्रद्धालुओं ने दिवंगत आत्माओं की शांति तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की. साथ ही पीड़ित परिवारों को धैर्य और साहस प्रदान करने के लिए भगवान श्रीराम से प्रार्थना की गई.
समारोह के दौरान कुमारगंज निवासी जंगजीत सिंह ने रामकथा संग्रहालय के संरक्षण हेतु लगभग 300 वर्ष पुरानी हस्तलिखित रामचरितमानस की पांडुलिपि भेंट की. इस दुर्लभ धरोहर को संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा.
ध्वजारोहण से पहले कई प्रमुख संतों और महंतों ने धर्म ध्वजा का पूजन किया. कार्यक्रम में विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया. श्रद्धालुओं को रामलला, राम परिवार और परिसर के अन्य मंदिरों में दर्शन-पूजन का अवसर दिया गया. ट्रस्ट की ओर से सभी अतिथियों के लिए अल्पाहार और प्रसाद की व्यवस्था भी की गई.
कार्यक्रम को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्र, मंदिर व्यवस्थापक गोपाल राव और संग्रहालय निदेशक डॉ. संजीव कुमार सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित किया. आयोजन की व्यवस्थाओं में ट्रस्ट और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
हालांकि इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को शामिल होना था, लेकिन लखनऊ में हुई अग्नि दुर्घटना के कारण उनका दौरा अंतिम समय में स्थगित कर दिया गया. संतों ने उनके दायित्वबोध और संवेदनशीलता की सराहना की.