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'प्रकृति की अनमोल धरोहर हैं', अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर CM योगी का विशेष संदेश

हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने के प्रति लोगों को जागरूक करना है.

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Edited By: Reepu Kumari
'प्रकृति की अनमोल धरोहर हैं', अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर CM योगी का विशेष संदेश
Courtesy: @myogiadityanath

लखनऊ: 29 जुलाई को पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के रूप में मनाती है. इस दिन का उद्देश्य लोगों को बाघों और उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है. बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि स्वस्थ जंगलों और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. पर्यावास के लगातार घटने, अवैध शिकार और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के कारण इनके संरक्षण की जरूरत पहले से अधिक बढ़ गई है. इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव संरक्षकों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि बाघ भारत की समृद्ध वन संपदा, जैव विविधता और प्राकृतिक विरासत का गौरवशाली प्रतीक है. मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि डबल इंजन सरकार बाघ संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और सभी नागरिकों से इस अनमोल धरोहर की रक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया.

सीएम योगी ने दिया संरक्षण का संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस सभी प्रकृति प्रेमियों के लिए प्रेरणा का दिन है. उन्होंने बाघ को साहस और सामर्थ्य का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है. उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने की अपील भी की.

क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस?

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में जंगली बाघों और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है. इस दिन सरकारें, वन विभाग, संरक्षण संगठन, विद्यालय और सामाजिक संस्थाएं विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करती हैं. इसका संदेश यही है कि यदि बाघ सुरक्षित रहेंगे, तो जंगल और उनसे जुड़ी पूरी जैव विविधता भी सुरक्षित रहेगी.

दुनिया में मौजूद हैं बाघ की छह जीवित उप-प्रजातियां

वर्तमान में बाघ की केवल एक प्रजाति पैंथेरा टाइग्रिस मौजूद है, जिसे छह जीवित उप-प्रजातियों में बांटा गया है. इनमें बंगाल, अमूर, इंडोचाइनीज, मलायन, सुमात्रा और दक्षिण चीन बाघ शामिल हैं. बंगाल टाइगर की सबसे अधिक संख्या भारत सहित नेपाल, भूटान और बांग्लादेश में पाई जाती है, जबकि दक्षिण चीन बाघ को जंगली अवस्था में लगभग विलुप्त माना जाता है.

सफेद और काले बाघों की सच्चाई क्या है?

सफेद और काले बाघ अलग प्रजातियां नहीं हैं. सफेद बाघ बंगाल टाइगर का एक दुर्लभ आनुवंशिक रूप होते हैं, जबकि काले बाघों को स्यूडो-मेलानिस्टिक बंगाल टाइगर कहा जाता है. इनकी धारियां सामान्य से अधिक गहरी और आपस में जुड़ी होती हैं. ऐसे दुर्लभ काले बाघ अब तक मुख्य रूप से ओडिशा के सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान और आसपास के क्षेत्रों में दर्ज किए गए हैं.

बाघों का संरक्षण क्यों है जरूरी?

विशेषज्ञों के अनुसार, बाघों का संरक्षण केवल एक वन्यजीव को बचाने तक सीमित नहीं है. यह जंगलों, जल स्रोतों और जैव विविधता की रक्षा से भी जुड़ा हुआ है. स्वस्थ जंगल लाखों लोगों की आजीविका और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसलिए बाघों की सुरक्षा को वैश्विक पर्यावरण संरक्षण का अहम हिस्सा माना जाता है.