अयोध्या: अयोध्या में रामलला को मिले उपहारों को लेकर उठे सवालों के बीच यह स्पष्ट किया गया है कि सभी प्रमुख भेंट सुरक्षित हैं. इन्हें न केवल संरक्षित रखा गया है, बल्कि श्रद्धालुओं के दर्शन और पूजा के लिए भी प्रदर्शित किया गया है.
हाल ही में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद कुछ लोगों ने रामलला को मिले विशेष उपहारों के गायब होने की आशंका जताई थी, लेकिन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन आशंकाओं को खारिज किया है.
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर देश और विदेश से हजारों श्रद्धालुओं, संस्थाओं और गणमान्य लोगों ने विशेष उपहार अर्पित किए थे. इन उपहारों को अयोध्या के रामसेवकपुरम और कारसेवकपुरम में बनाए गए अस्थायी संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है. यहां आने वाले श्रद्धालु इन उपहारों के दर्शन करने के साथ उन्हें श्रद्धा से नमन भी करते हैं.
हाल ही में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव लक्ष्मी नारायण ने सोने से मढ़ी रामचरितमानस समेत कुछ उपहारों के संबंध में सवाल उठाए थे. उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने सवा क्विंटल वजन वाली रामचरितमानस भेंट की थी, लेकिन उसकी रसीद नहीं मिली. इसके बाद सोशल मीडिया पर भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं. ट्रस्ट ने इन दावों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सभी उपहारों का रिकॉर्ड सुरक्षित है और प्रमुख भेंटें निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शित हैं.
प्रदर्शित उपहारों में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र 16 टन वजन की विशाल गदा और 1100 किलो का नगाड़ा हैं. इसके अलावा केरल से आया स्वर्ण जैसा धनुष बाण, नेपाल से लाई गई शालिग्राम शिलाएं, कर्नाटक की श्यामल शिला और मध्य प्रदेश से आया नर्मदेश्वर महादेव भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बने हुए हैं. बांसुरी, तलवार, खड़ाऊं, घंटा और शंख सहित अनेक धार्मिक उपहार भी यहां सुरक्षित रखे गए हैं.
रामसेवकपुरम पहुंचने वाले श्रद्धालु इन उपहारों के सामने माथा टेककर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं. तमिलनाडु से आई श्रद्धालु अथिका ने कहा कि यहां आकर उन्हें दिव्य अनुभव हुआ और उन्हें हर कण में भगवान का आभास होता है. वहीं उनकी साथी वी मीनाक्षी ने भी यहां के आध्यात्मिक वातावरण की सराहना की.
बिहार से आए श्रद्धालु राजित कुमार ने कहा कि भगवान को अर्पित चढ़ावे में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी अक्षम्य है. उन्होंने बताया कि उपहारों को सुरक्षित देखकर उन्हें संतोष हुआ और वह अपने राज्य लौटकर लोगों को इसकी जानकारी देंगे.
रामलला की प्रतिमा के निर्माण के लिए दक्षिण भारत और नेपाल से लाई गई शिलाओं में से तीन का चयन किया गया था. इनमें से एक शिला से वर्तमान विग्रह तैयार किया गया, जबकि अन्य शिलाओं को सुरक्षित रखा गया है. शेष अखंड शिलाएं भी रामसेवकपुरम में संरक्षित हैं, जहां श्रद्धालु दर्शन कर अपनी आस्था प्रकट करते हैं.