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India Daily

वृन्दावन से उठी सनातन चेतना की नई तस्वीर,‘सनातनी नारियल पानी’ बना जागरूकता का प्रतीक

वृन्दावन के प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन महाराज लंबे समय से हिंदुओं को संगठित करने और सनातन धर्म को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. वे लगातार सनातन बोर्ड के गठन की मांग कर रहे हैं.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
Prem Kaushik
Reported By: Prem Kaushik
वृन्दावन से उठी सनातन चेतना की नई तस्वीर,‘सनातनी नारियल पानी’ बना जागरूकता का प्रतीक
Courtesy: Prem Kaushik

देश भर में वर्तमान समय में हिंदुओं को जागृत करने और सनातन धर्म को सशक्त बनाने को लेकर संत, धर्माचार्य और हिंदू संगठनों की आवाज लगातार बुलंद होती जा रही है. अलग–अलग मंचों से हिंदू समाज को एकजुट करने के प्रयास किए जा रहे हैं. इसी क्रम में समय–समय पर धार्मिक, सामाजिक और वैचारिक आयोजन भी हो रहे हैं, जिनका उद्देश्य सनातन मूल्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है.

वृन्दावन के प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन महाराज लंबे समय से हिंदुओं को संगठित करने और सनातन धर्म को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. वे लगातार सनातन बोर्ड के गठन की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि आज के समय में सनातन बोर्ड की अत्यंत आवश्यकता है, जिससे हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके और सनातन परंपराओं की रक्षा सुनिश्चित हो.

इन्हीं प्रयासों के बीच वृन्दावन से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सनातन चेतना को नई पहचान दी है. यहां नारियल पानी बेचने वाले एक दुकानदार ने अपनी दुकान का नाम ‘सनातनी नारियल पानी’ रख दिया है. यह नाम अब स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. दुकानदार का कहना है कि यह नाम उसने भगवान की प्रेरणा से रखा है. उसका स्पष्ट कहना है कि उसका किसी भी समुदाय से कोई विवाद नहीं है, लेकिन वह सनातनी है और अपनी पहचान को सम्मान के साथ दर्शाना चाहता है.

इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए कथावाचक देवकीनंदन महाराज ने कहा कि हमारे वेदों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि यदि हमारा खान–पान शुद्ध होगा, तो हमारे विचार भी शुद्ध होंगे. इसी कारण सनातनियों को सामग्री भी सनातनियों से ही लेनी चाहिए. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मक्का–मदीना जैसे धार्मिक स्थलों पर स्पष्ट नियम लिखे होते हैं कि गैर धर्म के लोगों का आना वर्जित हैं. हम इसका सम्मान करते हैं, क्योंकि वे अपने धर्म के प्रति समर्पित हैं.

देवकीनंदन महाराज ने चिंता जताते हुए कहा कि भारत के सनातनी तीर्थ स्थलों पर इस प्रकार की गंभीरता नहीं बरती जा रही है. कई तीर्थ क्षेत्रों में ऐसे लोग सक्रिय हैं जो मांसाहार करते हैं, मदिरा बेचते हैं, भोजन में अपवित्र कृत्य करते हैं, जिससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आस्था को ठेस पहुंचती है. गंगा स्नान और भगवान की पूजा के लिए आने वाले श्रद्धालु ऐसे वातावरण में अपने धर्म और संस्कारों को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं.

उन्होंने ‘इंडिया डेली’ माध्यम से इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ‘सनातनी नारियल पानी’ जैसी सोच समाज को सही दिशा देने का काम कर रही है. उन्होंने दुकानदार का आभार जताया और मुस्लिम भाइयों से भी अपील की कि जैसे वे अपने तीर्थों की पवित्रता का सम्मान करते हैं, वैसे ही हिंदू तीर्थों की मर्यादा को भी समझें. उन्होंने कहा कि उनका किसी के प्रति दुर्भावना नहीं है, उनका उद्देश्य केवल सनातनियों की सुरक्षा और आस्था की रक्षा है.वो स्वयं कहे की जो हिन्दुओ के बड़े बड़े तीर्थ है उन तीर्थो में हम और हमारा कोई भी व्यक्ति वहाँ उनको परेशान नहीं करेगा.वहाँ भोजन की व्यवस्था, पूजा की व्यवस्था रिक्शा की व्यवस्था हम लोग नहीं करेंगे.

देवकीनंदन महाराज ने अंत में कहा कि यह समय सनातन के जागरण का है. सनातनी अब जाग रहे हैं और विरोधी भाग रहे है. सनातनी अपनी पहचान को लेकर सजग हो रहे हैं. यह बदलाव आने वाले समय में समाज को नई दिशा देगा.