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‘बहरों को सुनाने के लिए धमाका जरूरी’, IAS रिंकू सिंह के X पोस्ट से बढ़ी हलचल

आईएएस से इस्तीफा देने वाले रिंकू सिंह राही की सोशल मीडिया पोस्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल खड़े किए हैं. उधर, वकीलों का विरोध लगातार जारी है.

KanhaiyaaZee
‘बहरों को सुनाने के लिए धमाका जरूरी’, IAS रिंकू सिंह के X पोस्ट से बढ़ी हलचल
Courtesy: Social Media

जालौन: यूपी के जालौन में एसडीएम न्यायिक रिंकू सिंह राही एक बार फिर चर्चा में हैं. आईएएस पद से इस्तीफा देने के बाद उनकी सोशल मीडिया पोस्ट ने प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है. राही ने अपनी पोस्ट में राजस्व न्यायालयों की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुधार के लिए उन्हें दंड भी मिलता है तो वह इसे अवसर मानेंगे. दूसरी ओर, अधिवक्ताओं का विरोध खत्म नहीं हुआ है और वे उन्हें पद से हटाने की मांग पर कायम हैं.

व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली पोस्ट

रिंकू सिंह राही ने मंगलवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि राजस्व न्यायालयों में काफी अव्यवस्था है. उनके अनुसार प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी ही कई बार राजस्व न्यायालयों में पीठासीन अधिकारी की भूमिका निभाते हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रशासनिक काम को न्यायिक दायित्व से अधिक महत्व मिलने के कारण समस्याएं बनी रहती हैं. राही ने लिखा कि व्यवस्था में सुधार के प्रयास में उन्हें नुकसान हो सकता है, लेकिन बदलाव की उम्मीद बनी रहेगी.

बोले- दंड मिला तो मिलेगा नया अवसर

अपनी पोस्ट को लेकर राही ने स्पष्ट किया कि यह उनकी निजी राय है और उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति पर आरोप लगाना नहीं है. उन्होंने लिखा कि बहरों को सुनाने के लिए धमाका जरूरी है. साथ ही उन्होंने कहा कि वह व्यवस्था से अलग तरीके से काम कर रहे हैं, इसलिए दंड भी मिल सकता है. हालांकि, उनके मुताबिक यही दंड आगे सुधार का अवसर बन सकता है. उन्होंने व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए अपनी बात रखी.

जालौन में लगातार बढ़ता विवाद

रिंकू सिंह राही की जालौन तहसील में एसडीएम पद पर पहली तैनाती पांच मई को हुई थी. 23 जून को एक कोल्ड स्टोरेज की जांच के दौरान निवर्तमान ब्लाक प्रमुख राम राजा निरंजन के साथ विवाद हुआ. इसके बाद शिकायत की जांच एडीएम वित्त एवं राजस्व राजीव राज और एएसपी ईशांत सोनी कर रहे हैं. 30 जून को उनका स्थानांतरण सदर तहसील में एसडीएम न्यायिक के पद पर कर दिया गया. यहां भी उनकी कार्यशैली को लेकर विवाद सामने आते रहे.

वकीलों का असहयोग अब भी जारी

एसडीएम न्यायिक और अधिवक्ताओं के बीच जुलाई से विवाद चल रहा है. बार एसोसिएशन से जुड़े वकीलों का आरोप है कि राही अदालत में उनके मुवक्किलों के सामने उन्हें अपमानित करते हैं और तेज आवाज में बात करते हैं. वकीलों का यह भी आरोप है कि अनुपस्थिति की स्थिति में एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है. इसी के विरोध में तीन अगस्त से राजस्व न्यायालयों का असहयोग जारी है. बार पदाधिकारियों ने कहा है कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा.

सुरक्षा और प्रशासनिक फैसलों पर भी चर्चा

राही पहले अपनी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त गनर की मांग भी शासन से कर चुके हैं. इससे पहले नगरपालिका के विकास कार्यों की जांच और आधे काम के आधे वेतन से संबंधित पत्र जैसी उनकी पहल भी चर्चा में रही थी. उनकी कुछ सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई. अब आईएएस पद से इस्तीफे और ताजा पोस्ट के बाद मामला फिर सुर्खियों में है. फिलहाल वकीलों का विरोध और प्रशासनिक स्तर पर चल रही जांच आगे की तस्वीर तय करेगी.