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रंगभरी एकादशी पर वृंदावन में छाया होली का उल्लास, बांके बिहारी मंदिर में उड़ा अबीर-गुलाल

होली का त्यौहार बस आने ही वाला है. वृंदावन में आज रंगभरी एकादशी के अवसर पर भक्ति और उत्साह के साथ होली उत्सव की भव्य शुरुआत हुई.

Shilpa Shrivastava
Prem Kaushik
Reported By: Prem Kaushik
रंगभरी एकादशी पर वृंदावन में छाया होली का उल्लास, बांके बिहारी मंदिर में उड़ा अबीर-गुलाल
Courtesy: India Daily

वृंदावन: होली का त्यौहार बस आने ही वाला है. वृंदावन में आज रंगभरी एकादशी के अवसर पर भक्ति और उत्साह के साथ होली उत्सव की भव्य शुरुआत हुई. विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. मंगला आरती के बाद सेवायत गोस्वामियों ने ठाकुरजी को विधि-विधान से रंग और अबीर अर्पित किया, जिसके साथ ब्रज की पारंपरिक होली का शुभारंभ हो गया.

स्वर्ण जड़ित पिचकारी से ठाकुर बांके बिहारी ने भक्तों पर रंग बरसाया तो पूरा मंदिर परिसर “राधे-राधे” और “होली है” के जयघोष से गूंज उठा. प्रसादी गुलाल जैसे ही श्रद्धालुओं पर डाला गया, लोग भक्ति में सराबोर होकर झूमने लगे. इस दौरान फूलों की वर्षा की गई और जलेबी व लड्डुओं की प्रसादी भी लुटाई गई. प्रसाद लूटने के लिए भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिला.

सुबह से मंदिर में लंबी कतार:

सुबह से ही मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं. देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने पहले ठाकुरजी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया, फिर बाहर निकलकर एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाया. कुछ ही देर में पूरा परिसर अबीर और रंगों से सराबोर हो गया.

गाए जा रहे पारंपरिक होली गीत:

‘आज ब्रज में होली रे रसिया’ जैसे पारंपरिक होली गीतों पर भक्त नाचते-गाते नजर आए. ढोल-मंजीरों की थाप और भक्ति रस के बीच रंगभरी एकादशी का यह उत्सव ब्रज की सांस्कृतिक विरासत की झलक देता नजर आया. इसके साथ ही वृंदावन में होली के प्रमुख आयोजनों का सिलसिला औपचारिक रूप से शुरू हो गया है.

3 मार्च को होलिका दहन है. यह होली के एक दिन पहले शाम को होती है. इस दिन लकड़ियों के ढेर को जलाया जाता है. इस दिन भक्त प्रह्लाद की कहानी को याद किया जाता है कि कैसे बुराई को अग्नि में समर्पित किया जाता है. इसके अगले दिन यानी 4 मार्च को होली मनाई जाएगी, जिसे धुलेंडी भी कहा जाता है. इस दिन लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं और पानी से भी खेलते हैं. 

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