'वे जानते हैं कि ज्ञानवापी एक मंदिर है... मस्जिद नहीं', समझौता बैठक पर हिन्दू पक्ष ने दी प्रतिक्रिया
ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुझाई गई मध्यस्थता प्रक्रिया पर हिंदू पक्ष ने स्वागत किया है, जबकि मुस्लिम पक्ष के शामिल न होने की खबर पर उसने आपत्ति जताई है.
वाराणसी: वाराणसी के ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्यस्थता का सुझाव दिए जाने के बाद एक नया घटनाक्रम सामने आया है. प्रस्तावित मध्यस्थता बैठक से मुस्लिम पक्ष के अलग रहने की खबर के बाद हिंदू पक्ष ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है. हिंदू पक्ष का कहना है कि अदालत की पहल सामाजिक सद्भाव की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास थी और सभी पक्षों को इसमें शामिल होना चाहिए.
हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता सोहन लाल आर्या ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्यस्थता का सुझाव रचनात्मक कदम है और उनका पक्ष इसका स्वागत करता है. उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिद इंतजामिया कमेटी इस प्रक्रिया में शामिल नहीं होकर अदालत की पहल को आगे बढ़ाने में सहयोग नहीं कर रही है. उनके अनुसार बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास समाज के हित में है.
सोहन लाल आर्या ने क्या कहा?
सोहन लाल आर्या ने अपने दावों का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व में हुए सर्वेक्षण के दौरान कई धार्मिक प्रतीकों और संरचनाओं से जुड़े साक्ष्य मिलने का दावा किया गया था. उन्होंने कहा कि इन तथ्यों के आधार पर उनका पक्ष अपने दावे पर कायम है. हालांकि इन दावों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही किया जाना है.
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हिंदू पक्ष से अन्य लोगों ने क्या कहा?
हिंदू पक्ष की एक अन्य वादी लक्ष्मी देवी ने भी मुस्लिम पक्ष के रुख पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने से बच रहा है. उन्होंने अपने पक्ष का दावा दोहराते हुए कहा कि वे अदालत के माध्यम से अपने अधिकार की मांग कर रहे हैं और चाहते हैं कि विवाद का समाधान न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार हो.
इस मामले में मुस्लिम पक्ष का क्या है कहना?
दूसरी ओर इस मामले में मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वह अपने कानूनी अधिकारों के अनुसार न्यायालय में अपना पक्ष रखेगा. ज्ञानवापी विवाद से संबंधित विभिन्न याचिकाएं अभी न्यायालय में लंबित हैं और मामले की सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत जारी है.