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सरकारी अस्पतालों में आवारा कुत्तों की नो एंट्री! शासन ने जारी किए सख्त आदेश, लापरवाही पर होगी कार्यवाही

सरकारी अस्पतालों में आवारा कुत्तों और पशुओं की बढ़ती आवाजाही रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने फिर सख्त निर्देश जारी किए हैं. अधिकारियों को अभियान चलाने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध रखने को कहा गया है.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
सरकारी अस्पतालों में आवारा कुत्तों की नो एंट्री! शासन ने जारी किए सख्त आदेश, लापरवाही पर होगी कार्यवाही
Courtesy: AI (Grok)

सरकारी अस्पतालों में मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर सख्त कदम उठाए हैं. अस्पताल परिसरों में आवारा कुत्तों और पशुओं की मौजूदगी पर शासन ने नाराजगी जताई है. पहले नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं होने पर अब सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों, अस्पताल निदेशकों और अधीक्षकों को नए सिरे से अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही सुरक्षा इंतजामों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है.

शासन ने जारी किए नए निर्देश

स्वास्थ्य महानिदेशक पवन कुमार अरुण ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों, अस्पताल निदेशकों और अधीक्षकों को पत्र भेजकर अस्पताल परिसरों को आवारा पशुओं और कुत्तों से मुक्त रखने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों से कहा गया है कि स्थानीय नगर निकायों के साथ समन्वय बनाकर नियमित अभियान चलाया जाए ताकि अस्पताल परिसर सुरक्षित बने रहें.

सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर

निर्देशों में अस्पतालों के मुख्य प्रवेश द्वार, चाहरदीवारी और बाड़ जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया है. उद्देश्य यह है कि आवारा कुत्ते और अन्य पशु अस्पताल परिसर में प्रवेश न कर सकें. इससे मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल कर्मियों की सुरक्षा बेहतर हो सकेगी.

एंटी रैबीज इंजेक्शन रहेगा उपलब्ध

स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं. यदि किसी व्यक्ति को कुत्ते के काटने जैसी घटना का सामना करना पड़े तो उसे तुरंत उपचार मिल सके. विभाग ने इसे अस्पतालों की अनिवार्य व्यवस्था का हिस्सा बनाने को कहा है.

पहले भी दिए गए थे निर्देश

जनवरी में तत्कालीन स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रतन पाल सिंह सुमन ने भी इसी संबंध में सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश जारी किए थे. उस समय अस्पतालों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन इसके बावजूद कई स्थानों पर आवारा पशुओं और कुत्तों की समस्या बनी रही. इसी कारण शासन ने दोबारा सख्ती दिखाई है.

लापरवाही पर होगी कार्यवाही

स्वास्थ्य महानिदेशक ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान में किसी भी स्तर पर शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी. सभी संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है. यदि किसी अस्पताल में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.