गोरखपुर AIIMS की साख पर लगा बट्टा, इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल पहुंचीं निदेशक
गोरखपुर AIIMS की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा. उन्होंने इसकी वजह संस्थान में कैथ लैब की सुविधा नहीं होना बताया.
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं. दरअसल, संस्थान की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता की अचानक तबीयत खराब हो गई. उन्हें इलाज के लिए गोरखपुर AIIMS की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनकी जांच और उपचार किया. हालांकि, हार्ट से जुड़ी रिपोर्ट पर अतिरिक्त चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए उन्हें एक निजी अस्पताल जाना पड़ा.
अचानक बेहोश हो गई थीं डॉ. विभा दत्ता
जानकारी के मुताबिक, बुधवार को डॉ. विभा दत्ता की उनके आवास पर अचानक तबीयत बिगड़ गई थी. उन्हें घबराहट हुई और वह कुछ सेकेंड के लिए बेहोश हो गईं. इसके बाद उन्हें तत्काल गोरखपुर AIIMS लाया गया. यहां डॉक्टरों ने उनकी जांच की और जरूरी उपचार शुरू किया. अस्पताल में उनकी सभी आवश्यक जांच की गईं.
कैथ लैब की सुविधा नहीं होने से जाना पड़ा निजी अस्पताल
डॉ. विभा दत्ता ने खुद निजी अस्पताल जाने की वजह स्पष्ट की. उन्होंने बताया कि गोरखपुर AIIMS में फिलहाल कैथ लैब की सुविधा उपलब्ध नहीं है. इस सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाएं और उपकरण अभी लगाए जा रहे हैं. इसी कारण वह एंबुलेंस से एक निजी अस्पताल पहुंचीं और वहां डॉक्टरों से अपनी हार्ट संबंधी रिपोर्ट पर सलाह ली.
Also Read
उन्होंने बताया कि निजी अस्पताल में उन्होंने गोरखपुर AIIMS में हुई जांच की रिपोर्ट ही दिखाई थी. वहां डॉक्टरों ने रिपोर्ट देखने के बाद सब कुछ सामान्य बताया और किसी तरह की परेशानी नहीं होने की जानकारी दी. इसके बाद वह वापस लौट आईं.
आधे घंटे में पूरी हुई प्रक्रिया
कार्यकारी निदेशक के मुताबिक, निजी अस्पताल जाने और डॉक्टरों से सलाह लेने की पूरी प्रक्रिया में करीब आधा घंटा लगा. उन्होंने यह भी बताया कि उनकी जांच और इलाज गोरखपुर AIIMS में ही हुआ था. निजी अस्पताल में केवल रिपोर्ट के आधार पर अतिरिक्त सलाह ली गई थी. वह अगले दिन यानी गुरुवार से दोबारा कार्यालय भी पहुंचने लगीं.
सात साल बाद भी कैथ लैब की सुविधा नहीं
गोरखपुर AIIMS की शुरुआत फरवरी 2019 में हुई थी. इसे पूर्वांचल और बिहार के सीमावर्ती जिलों के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान माना जाता है. हालांकि, करीब सात साल बाद भी यहां कैथ लैब की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है.
कैथ लैब हृदय की धमनियों की जांच और एंजियोप्लास्टी जैसी प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में इस सुविधा का अभाव गंभीर हृदय रोगियों के इलाज और उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है.
2025 में संभाली थी कार्यकारी निदेशक की जिम्मेदारी
डॉ. विभा दत्ता ने 30 जनवरी 2025 को गोरखपुर AIIMS की कार्यकारी निदेशक का पद संभाला था. इससे पहले वह 2018 से 2023 तक AIIMS नागपुर की निदेशक रह चुकी हैं. वह गोरखपुर AIIMS की पांचवीं कार्यकारी निदेशक हैं. उनके निजी अस्पताल जाने की घटना के बाद संस्थान में कैथ लैब समेत जरूरी चिकित्सा सुविधाओं को जल्द शुरू करने की जरूरत पर चर्चा तेज हो गई है.