हर घंटे 5 टन फ्रेंच फ्राइज बनाएगी गुजरात की यह फैक्ट्री, पीएम मोदी ने शेयर की तस्वीर

गुजरात के बनासकांठा में बनास डेयरी की फ्रेंच फ्राइज फैक्ट्री की क्षमता बढ़ाकर पांच टन प्रति घंटा कर दी गई है. इससे आलू किसानों को नए बाजार मिलेंगे.

@ANI
Sagar Bhardwaj

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में फ्रेंच फ्राइज बनाने वाली एक बड़ी फैक्ट्री की तस्वीरें साझा की हैं. उन्होंने शुक्रवार को बनास डेयरी के तीन प्रमुख बुनियादी ढांचा और शोध परियोजनाओं के उद्घाटन के तहत इस प्लांट का वर्चुअल उद्घाटन किया. पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम पर फैक्ट्री की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'खेत से फैक्ट्री और फिर फ्राइज तक. मेड इन इंडिया, दुनिया के लिए.'

2019 में अमूल ब्रांड के तहत हुई शुरुआत

बनास डेयरी ने 2019 में अमूल ब्रांड के तहत फ्रेंच फ्राइज के कारोबार में कदम रखा था. इसके बाद उसने आलू की खेती से लेकर तैयार उत्पाद की बिक्री तक पूरी सप्लाई चेन विकसित की. इसमें टिश्यू कल्चर से पौधे तैयार करना, बीज उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज, किसानों से आलू खरीदना और बाजार तक उत्पाद पहुंचाना शामिल है.


डेयरी के मुताबिक, वह देश की एकमात्र सहकारी संस्था है, जो आलू के प्रसंस्करण के लिए इस तरह की पूरी व्यवस्था संचालित करती है. इसमें किसानों को बीमारी से मुक्त पौध सामग्री और प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाता है.

25 साल में आलू की खेती का दायरा बढ़ा

बनासकांठा में फ्रेंच फ्राइज जैसे उत्पादों के लिए इस्तेमाल होने वाले आलू की खेती में पिछले 25 वर्षों में बड़ा विस्तार हुआ है. जिले में आलू की खेती का रकबा करीब 400 हेक्टेयर से बढ़कर 61 हजार हेक्टेयर से अधिक हो गया है. वर्ष 2024-25 में यहां लगभग 18.7 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ. प्रति हेक्टेयर उत्पादकता करीब 30 टन रही.

किसानों को पहले ही मिल जाती है खरीद कीमत की जानकारी

बनास डेयरी की योजना के तहत किसानों को बीज देते समय ही आलू की खरीद कीमत तय कर दी जाती है. इससे किसानों को फसल तैयार होने से पहले अपनी कमाई का अनुमान लगाने में मदद मिलती है.

डेयरी के अनुसार, 2023-24 में कीमतों के अंतर के भुगतान के रूप में किसानों को 1.83 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए. वर्ष 2024-25 में खरीद कीमत 13 रुपये प्रति यूनिट और 2025-26 में 14 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई थी.

सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए 2024 में 10 हजार टन क्षमता वाला कोल्ड स्टोरेज भी बनाया गया. नवंबर 2025 में प्रमाणित आलू बीज की उपलब्धता बढ़ाने के लिए भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड के साथ समझौता किया गया.

भारत से बढ़ रहा है आलू उत्पादों का निर्यात

देश में प्रसंस्कृत आलू उत्पादों की मांग और निर्यात में भी बढ़ोतरी हो रही है. वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 2.77 लाख टन ऐसे उत्पादों का निर्यात किया, जिनकी कीमत लगभग 2,744.50 करोड़ रुपये रही.

फैक्ट्री की क्षमता बढ़ने से बनासकांठा के किसानों को आलू बेचने के नए अवसर मिलने की उम्मीद है. साथ ही, इससे भारत के प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की वैश्विक बाजार में पहुंच मजबूत हो सकती है.