गाजियाबाद: यूपी के गाजियाबाद में एक रिहायशी टावर से कूदकर जान देने वाली तीन नाबालिग बहनों की मौत ने पूरे देश को सन्न कर दिया है. शुरुआती जांच में इसे केवल एक हादसा माना जा रहा था, लेकिन पुलिस ने जब उनके बेचे गए मोबाइल फोन बरामद किए, तो एक डरावनी सच्चाई सामने आई. इन लड़कियों को न केवल के-पॉप और कोरियन ड्रामा का जुनून था, बल्कि वे दिन में 20 घंटे तक ऑनलाइन गेमिंग और विदेशी कंटेंट में डूबी रहती थीं.
पुलिस ने जब पिता द्वारा बेचे गए फोन का डेटा रिकवर किया, तो पता चला कि लड़कियां कोरियन, चीनी और जापानी शो देखने की चरम सीमा तक आदी थीं. वे अपना ज्यादातर समय यूट्यूब पर के-पॉप गाने सुनने और डोरेमोन, शिनचैन जैसे कार्टून देखने में बिताती थीं. यह डिजिटल दुनिया उनके लिए वास्तविक जीवन से अधिक महत्वपूर्ण हो गई थी. जब उनसे फोन छीना गया, तो वे गहरे मानसिक तनाव, चिड़चिड़ेपन और भावनात्मक अकेलेपन का बुरी तरह शिकार हो गईं.
जांचकर्ताओं को लड़कियों के फोन में कई खतरनाक और डरावने गेम्स से जुड़े मटीरियल मिले. सुसाइड नोट में 'पॉपी प्ले टाइम', 'द बेबी इन येलो' और 'ईविल नन' जैसे हॉरर गेम्स का विशेष जिक्र था. पुलिस ने पाया कि ये गेम्स बच्चों के कोमल मन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल रहे थे और उन्हें हिंसक बना रहे थे. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, गाजियाबाद पुलिस ने सरकार को एक रिपोर्ट भेजकर इन पांचों गेम्स पर तुरंत प्रतिबंध (Niyam) लगाने की मांग की है.
इस दुखद घटना के पीछे केवल इंटरनेट की लत ही नहीं, बल्कि भारी आर्थिक दबाव और पारिवारिक कलह भी जिम्मेदार था. लड़कियों के पिता पर करीब 2 करोड़ रुपये का भारी कर्ज था, जिसके कारण घर में अक्सर तनावपूर्ण माहौल बना रहता था. इसी आर्थिक तंगी के कारण पिता ने लड़कियों के मोबाइल फोन महज 15,000 रुपये में बेच दिए थे. पिता का यह सख्त फैसला लड़कियों के लिए असहनीय साबित हुआ और उनके बीच मानसिक दूरियां और बढ़ गईं.
बहनों ने मरने से पहले एक विस्तृत डायरी और सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें घर पर होने वाली शारीरिक मारपीट और भावनात्मक उपेक्षा का मार्मिक जिक्र था. उन्होंने लिखा कि वे इस दुनिया में केवल पिटने के लिए पैदा नहीं हुई हैं और अपमान से बेहतर मौत है. कोरियन कल्चर के प्रति उनके बढ़ते जुनून को पिता पसंद नहीं करते थे, इसलिए उन्होंने जबरन फोन छीन लिए थे. इंटरनेट और अपने कोरियन दोस्तों से दूर होना उनके लिए एक मानसिक त्रासदी बन गया.
पुलिस अब उस दूसरे मोबाइल फोन को रिकवर करने की कोशिश कर रही है जिसे पिता ने तीन महीने पहले किसी दुकान पर बेचा था. फोरेंसिक टीम डिलीट किए गए सोशल मीडिया चैट, यूट्यूब हिस्ट्री और अन्य डेटा को बारीकी से खंगाल रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सुसाइड से पहले उन्होंने किसी बाहरी व्यक्ति से कोई खतरनाक संपर्क तो नहीं किया था. यह मामला समाज में बच्चों की मानसिक स्थिति और बढ़ती डिजिटल लत की एक कड़वी हकीकत को बयां करता है.