लखनऊ: योगी आदित्यनाथ सरकार ने विधानसभा में अपने दूसरा कार्यकाल का आखिरी पूरा बजट पेश किया. वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 9.12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का यह बजट सदन के पटल पर रखा, जो उत्तर प्रदेश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट है. उन्होंने बताया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय अब 1 लाख 20 हजार रुपये पहुंच चुकी है.
यह बजट विकास, सुशासन और जनकल्याण पर केंद्रित है. सरकार का लक्ष्य राज्य को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का है. बजट में पिछड़े क्षेत्रों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए कई राहतों की उम्मीद जगी है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह बजट सरकार की उपलब्धियों को दिखाने वाला माना जा रहा है.
बजट में पूर्वांचल, बुंदेलखंड और अन्य पिछड़े इलाकों के संतुलित विकास पर खास जोर दिया गया है. क्षेत्रीय असमानता कम करने के लिए पर्याप्त धनराशि का प्रावधान किया गया है. इससे इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा, रोजगार और शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद है. सरकार का मकसद सभी क्षेत्रों को समान विकास देना है, ताकि राज्य का हर हिस्सा आगे बढ़ सके.
वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजनों के भरण-पोषण के लिए बजट में अच्छी बढ़ोतरी की संभावना है. शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि से लाखों शिक्षकों को फायदा मिल सकता है. ये कदम कमजोर वर्गों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए उठाए जा रहे हैं. सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और प्रभावी बनाने पर फोकस रहेगा.
कैबिनेट बैठक में यूपीसीडा से जुड़े प्रोजेक्ट, लखनऊ मेट्रो के विस्तार, गौतम बुद्ध विकास प्राधिकरण की संपत्तियों का विकास और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों से संबंधित कई प्रस्ताव मंजूर हो सकते हैं. चित्रकूट लिंक परियोजना और बलरामपुर चीनी मिल्स की नई इकाई जैसे प्रस्ताव भी शामिल हैं. आयुष विभाग की CAG रिपोर्ट सदन में रखी जा सकती है.
यह बजट उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम है. सरकार का पूरा ध्यान विकास, सुशासन और जनकल्याण पर है. किसानों, युवाओं, महिलाओं और पिछड़े वर्गों के लिए कई बड़ी राहतों की उम्मीद है. बजट की विस्तृत चर्चा विधानसभा में होगी, जो राज्य की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी.