लखनऊ: राजधानी लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर कड़े प्रहार किए. उन्होंने प्रदेश के बजट को 'विदाई बजट' की संज्ञा देते हुए कहा कि यह भाजपा की सत्ता से वापसी का मार्ग प्रशस्त करेगा. अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार केवल बजट का कुल आकार बढ़ाकर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर विकास के लिए आवंटित राशि का सही उपयोग करने में शासन पूरी तरह विफल रहा है.
अखिलेश यादव ने सरकारी आंकड़ों के जरिए यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि सरकार अपने वादों के विपरीत काम कर रही है. उन्होंने खुलासा किया कि कृषि विभाग में केवल 57 प्रतिशत और स्वास्थ्य क्षेत्र में महज 58 प्रतिशत बजट ही खर्च हो पाया है. उन्होंने प्रश्न उठाया कि जब सरकार पहले से आवंटित धन का साठ प्रतिशत हिस्सा भी उपयोग नहीं कर पा रही है, तो नए और बड़े बजट का दावा केवल एक कागजी औपचारिकता और जनता के साथ धोखा है.
प्रदेश को 90 लाख करोड़ की विशाल अर्थव्यवस्था बनाने के सरकारी लक्ष्य को अखिलेश ने पूरी तरह अव्यवहारिक बताया. उन्होंने तर्क दिया कि इस महत्वाकांक्षी मंजिल तक पहुंचने के लिए राज्य को न्यूनतम 30 प्रतिशत की विकास दर की आवश्यकता होगी, जो वर्तमान परिस्थितियों में असंभव प्रतीत होती है. सपा प्रमुख ने कहा कि सरकार के पास न तो बेरोजगारी दूर करने का कोई स्पष्ट नियम है और न ही किसानों की बदहाली सुधारने के लिए कोई ठोस और प्रभावी योजना दिखाई देती है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार द्वारा किए गए 50 लाख करोड़ के निवेश दावों और हस्ताक्षरित एमओयू (MOU) की सत्यता पर गंभीर साक्ष्य मांगे. उन्होंने कहा कि यदि निवेश वास्तव में धरातल पर उतरा होता, तो प्रदेश के युवाओं को आज रोजगार के लिए दर-दर नहीं भटकना पड़ता. अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार प्रति व्यक्ति आय के मामले में अन्य देशों की तुलना में काफी पीछे है और मुफ्त राशन पाने वालों की वास्तविक आय का डेटा जानबूझकर छिपाया जा रहा है.
स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए अखिलेश ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि सरकार जानबूझकर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को ठप कर रही है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को अंततः निजी हाथों में सौंपा जा सके. प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाना केवल एक दिखावा है क्योंकि वहां न तो पर्याप्त डॉक्टर मौजूद हैं और न ही मरीजों के सटीक इलाज के लिए जरूरी उपकरण. यह बजट स्वास्थ्य के प्रति सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है.
किसानों की आय दोगुनी करने के वादे को अखिलेश ने एक क्रूर मजाक बताया. गन्ने के दामों और नई आर्थिक नीतियों से किसानों के साथ-साथ सूक्ष्म और लघु उद्योग (MSME) क्षेत्र को भी भारी क्षति पहुंचने की आशंका जताई गई है. सपा मुखिया ने कहा कि यूपी की रजिस्टर्ड एमएसएमई इकाइयों तक भी सरकारी मदद नहीं पहुंच पा रही है. अंततः उन्होंने इस पूरे बजट को जनविरोधी और केवल आंकड़ों की बाजीगरी बताते हुए इसे जनता की उम्मीदों के साथ एक बड़ा खिलवाड़ करार दिया.