लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बाढ़ राहत कार्य तेज करने के लिए योगी सरकार ने प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है. प्रदेश के प्रभावित जिलों में बाढ़ राहत कार्य, बचाव अभियान और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है. गांवों में नाव, मोटर बोट, बचाव दल, चिकित्सा दल और सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की गई है. प्रशासन का जोर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, जरूरी सामान देने और पशुधन की रक्षा करने पर भी है.
राहत आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में अब तक 19 जिले बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. इनमें 14 जिलों में बाढ़ का प्रभाव दर्ज किया गया है. कुल 258 गांवों में बाढ़ का असर पड़ा है, जबकि 157 गांवों में राहत कार्य लगातार चलाया जा रहा है.
बाढ़ और जलभराव के कारण ग्रामीण इलाकों की करीब 1.45 लाख आबादी प्रभावित हुई है. प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित रखने के लिए बाढ़ शरणालय और अन्य सुरक्षित स्थान तैयार किए हैं.
कई गांवों में कृषि भूमि, संपर्क मार्ग और आबादी पर बाढ़ का असर पड़ा है. 27 गांवों में कटान और 75 गांवों में जलभराव के कारण आबादी प्रभावित हुई है.
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान को मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में नाव और बचाव दल लगाए गए हैं. प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक राहत और बचाव के लिए 1,599 नावें और 621 मोटर बोट तैनात हैं. इसके अलावा 1,315 स्थानीय गोताखोर, 12 राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें, 9 राज्य आपदा मोचन बल की टीमें और 7 प्रांतीय सशस्त्र बल की टीमें काम कर रही हैं. खोज और बचाव के लिए 6,032 वाहन भी लगाए गए हैं.
बाढ़ से केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशुधन पर भी असर पड़ा है. रिपोर्ट के अनुसार करीब 15,561 पशु प्रभावित हुए हैं. इनके लिए पशु शिविर बनाए गए हैं और उपचार के साथ टीकाकरण की व्यवस्था की गई है. अब तक 544 पशुओं का उपचार किया गया है, जबकि 12,695 पशुओं का टीकाकरण कराया गया. पशुओं के लिए 22,636 क्विंटल भूसा भी वितरित किया गया है.
बाढ़ और अत्यधिक बारिश से प्रदेश में 17,428.01 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है. इसमें 8,452.88 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि और 3,903.16 हेक्टेयर बोया गया क्षेत्र शामिल है. फसल नुकसान की भरपाई के लिए 200.31 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जा चुका है.
राहत सामग्री के वितरण में भी प्रशासन लगातार जुटा हुआ है. प्रभावित लोगों को खाद्यान्न सामग्री के साथ तिरपाल, पीने का पानी और जरूरी स्वास्थ्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है.
स्थानीय स्तर पर राहत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 12,687 राहत चौपालें लगाई गई हैं. इसके साथ ही 6,704 आपदा मित्रों को प्रशिक्षित किया गया है. ये प्रशिक्षित स्वयंसेवक प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने, जरूरी जानकारी देने और आपात स्थिति में बचाव दल का सहयोग करने में जुटे हैं. सरकार का जोर फिलहाल प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, भोजन और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने तथा बीमारी और पशुधन से जुड़ी समस्याओं को रोकने पर है.