गोरखपुर ने रचा नया रेल इतिहास, 120 की रफ्तार से दौड़ी कारखाने में तैयार पहली वंदे भारत

गोरखपुर के यांत्रिक कारखाने में ओवरहालिंग के बाद तैयार हुई पहली 16 कोच वाली वंदे भारत ट्रेन का सफल ट्रायल पूरा हो गया. ट्रेन ने गोरखपुर-बढ़नी रेलखंड पर 110 से 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़कर अपनी फिटनेस साबित की.

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Reepu Kumari

गोरखपुर के यांत्रिक कारखाने ने रेलवे के लिए एक नई उपलब्धि दर्ज की है. यहां ओवरहालिंग के बाद तैयार हुई पहली 16 कोच वाली वंदे भारत ट्रेन का मंगलवार को सफल ट्रायल किया गया. गोरखपुर-बढ़नी रेलखंड पर ट्रेन ने 110 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ते हुए अपनी तकनीकी क्षमता और फिटनेस का प्रदर्शन किया. रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह सेमी हाईस्पीड ट्रेन अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने में सक्षम है.

ट्रायल सफल रहने के बाद रेक को फिट घोषित किया जाएगा. इसके बाद यही वंदे भारत गोरखपुर, अयोध्या, लखनऊ और प्रयागराज के बीच नियमित सेवा में शामिल होगी. फिलहाल इस रूट पर दूसरे जोन की रेक से ट्रेन का संचालन किया जा रहा है.

पहली बार कारखाने में हुई 16 कोच वाली रेक की ओवरहालिंग

गोरखपुर के यांत्रिक कारखाने में पहली बार 16 कोच वाली वंदे भारत ट्रेन की ओवरहालिंग की गई है. यह काम आसान नहीं था, क्योंकि कारखाने में कई आवश्यक संसाधनों और विशेष उपकरणों की कमी थी. इसके बावजूद इंजीनियरों और कर्मचारियों ने समन्वय के साथ पूरी प्रक्रिया पूरी की और रेक को ट्रायल के लिए तैयार कर दिया.


डिपो नहीं होने से बढ़ रही थीं रेलवे की चुनौतियां

गोरखपुर में वंदे भारत ट्रेनों की सफाई और सामान्य मरम्मत की व्यवस्था तो न्यू कोचिंग डिपो में उपलब्ध है, लेकिन ओवरहालिंग के लिए अलग डिपो नहीं है. रेलवे बोर्ड ने वंदे भारत डिपो के निर्माण को मंजूरी दी है, लेकिन पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है. इससे ट्रेनों की ओवरहालिंग प्रभावित हो रही थी.

इंजीनियरों और सुपरवाइजरों ने संभाली जिम्मेदारी

ओवरहालिंग की समस्या को देखते हुए कारखाना प्रबंधन ने अपने इंजीनियरों और सुपरवाइजरों की टीम पर भरोसा जताया. इसी निर्णय के तहत कारखाने में पहली बार वंदे भारत की रेक की ओवरहालिंग पूरी की गई. सफल ट्रायल ने यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद तकनीकी टीम ने चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से पूरा किया.

दो वंदे भारत ट्रेनों का हो रहा है रखरखाव

फिलहाल गोरखपुर से प्रयागराज और पाटलिपुत्र के बीच चलने वाली दो वंदे भारत ट्रेनों की सफाई, धुलाई और नियमित रखरखाव न्यू कोचिंग डिपो में किया जा रहा है. हालांकि बढ़ती ट्रेनों के कारण वहां जगह की कमी महसूस की जा रही है. ऐसे में भविष्य में रखरखाव और ओवरहालिंग दोनों रेलवे प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं.

आने वाले समय में बढ़ेगा वंदे भारत का संचालन

रेलवे प्रशासन के सामने आने वाले वर्षों में वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ने की संभावना है. ऐसे में रखरखाव और ओवरहालिंग की मजबूत व्यवस्था की जरूरत भी बढ़ेगी. उल्लेखनीय है कि 7 जुलाई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर जंक्शन से पहली वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी. अब कारखाने में तैयार पहली ओवरहाल रेक का सफल ट्रायल गोरखपुर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.