रोजा इफ्तार पार्टी में 'बर्फी युद्ध' देखकर भूल जाएंगे बागपत का 'चाट युद्ध', वीडियो में देखें पाक महीने में रोजेदारों के बीच मारपीट

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इफ्तार का समय होते ही बड़ी संख्या में लोग खाने-पीने के स्टॉल की ओर बढ़े. सीमित मात्रा में मिठाई उपलब्ध होने के कारण कुछ लोगों के बीच कहासुनी शुरू हुई. देखते ही देखते धक्का-मुक्की होने लगी और कई लोग एक-दूसरे से भिड़ गए

Anuj

मेरठ: पश्चिमी यूपी के मेरठ जिले में आयोजित एक इफ्तार कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्था और मारपीट की घटना सामने आई है. बताया जा रहा है कि रोजा खोलने पहुंचे लोगों की संख्या अपेक्षा से अधिक होने के कारण मिठाई कम पड़ गई.

इसी को लेकर पहले विवाद हुआ और फिर कुछ ही मिनटों में माहौल झड़प में बदल गया. घटना का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, हालांकि प्रशासन ने अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.

कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इफ्तार का समय होते ही बड़ी संख्या में लोग खाने-पीने के स्टॉल की ओर बढ़े. सीमित मात्रा में मिठाई उपलब्ध होने के कारण कुछ लोगों के बीच कहासुनी शुरू हुई. देखते ही देखते धक्का-मुक्की होने लगी और कई लोग एक-दूसरे से भिड़ गए. कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया. वायरल वीडियो में कुर्सियों के खिसकने और लोगों के बीच हाथापाई जैसे दृश्य नजर आ रहे हैं.  

वीडियो की पुष्टि नहीं हुई

बताया जाता है कि मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर दिया गया. वीडियो के वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह वीडियो मेरठ के किस इलाके या थाना क्षेत्र का है. स्थानीय स्तर पर भी इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है.

पुलिस प्रशासन ने बयान नहीं जारी किया

पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. न ही यह स्पष्ट हुआ है कि कार्यक्रम आयोजकों ने प्रशासन को इसकी सूचना दी थी या नहीं. ऐसे में वायरल वीडियो की सत्यता और स्थान को लेकर संदेह की स्थिति बनी हुई है. 

समाज के कई लोगों ने चिंता जताई

इस घटना को लेकर समाज के कई लोगों ने चिंता जताई है. मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों का कहना है कि रमजान का पवित्र महीना संयम, धैर्य और भाईचारे का संदेश देता है. इफ्तार जैसे सामूहिक धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य सामाजिक सौहार्द बढ़ाना होता है, लेकिन इस तरह की घटनाएं समाज में गलत संदेश देती हैं.

स्थानीय लोगों ने क्या कहा?

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी होता है. यदि भोजन या अन्य सामग्री सीमित हो, तो उसे व्यवस्थित ढंग से वितरित किया जाना चाहिए ताकि विवाद की स्थिति पैदा न हो. फिलहाल, वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि और घटना के वास्तविक स्थान का पता लगना बाकी है.