लड्डू मार होली कैसे हुई थी शुरुआत? तस्वीरों में देखें भव्य आयोजन
लड्डू मार होली
ब्रज की पावन धरती पर होली के रंग अब पूरी तरह चढ़ने लगे हैं. विश्व प्रसिद्ध लाडली जी मंदिर में परंपरागत लड्डू मार होली का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु बरसाना पहुंचे.
राधे-राधे का संकीर्तन
सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब श्रीजी मंदिर की ओर उमड़ पड़ा. दोपहर होते-होते मंदिर परिसर खचाखच भर गया. भक्त हाथ ऊपर उठाए राधे-राधे का संकीर्तन करते हुए मंदिर के कपाट खुलने का इंतजार करते रहे.
श्रीजी के दर्शन
कपाट खुलते ही मंदिर परिसर में लड्डू मार होली का उत्सव आरंभ हो गया. श्रद्धालुओं ने श्रीजी के दर्शन कर गुलाल अर्पित किया और प्रसाद स्वरूप लड्डू चढ़ाए.
चारों ओर से लड्डुओं की वर्षा
नंदगांव से सखा स्वरूप कृष्ण पक्ष के प्रतिनिधि सजे-धजे बरसाना पहुंचे. गोस्वामी समाज ने उनका बूंदी के लड्डुओं से स्वागत किया. देखते ही देखते चारों ओर से लड्डुओं की वर्षा होने लगी.
लड्डू पाने के लिए हाथ ऊपर
मंदिर प्रांगण में मौजूद श्रद्धालु प्रसाद स्वरूप लड्डू पाने के लिए हाथ ऊपर उठाकर खड़े हो गए. वातावरण भक्तिभाव, उल्लास और प्रेम से भर उठा.
क्या है मान्यता?
मान्यता है कि यह परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है. कथा के अनुसार, बरसाना से सखी स्वरूप राधा नंदगांव होली का निमंत्रण लेकर गई थीं.
नंदबाबा को मिला था निमंत्रण
नंदबाबा ने इस निमंत्रण को स्वीकार करते हुए अपने पुरोहित के माध्यम से बृषभान जी को सूचना भेजी थी. जब नंदगांव से आए पुरोहित का बरसाना में स्वागत किया गया, तो उन्हें खाने के लिए लड्डू दिए गए.
पुरोहित ने गोपियों पर फेंका लड्डू!
इसी दौरान गोपियों ने उनके गालों पर गुलाल लगाया, गुलाल न होने पर पुरोहित ने लड्डुओं को ही गोपियों पर फेंकना शुरू कर दिया. तभी से बरसाना में लड्डू होली खेलने की परंपरा प्रारंभ हुई, जो आज भी उसी उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है.
ब्रज की होली
बरसाना की लड्डू मार होली ब्रज की होली उत्सव श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके बाद कल बरसाना में विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली का आयोजन होगा, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं.
इनपुट-प्रेम कौशिक