जनपद आगरा में सोशल मीडिया पर वर्दी पहनकर रील बनाने और अपनी लोकप्रियता चमकाने वाले आठ पुलिसकर्मियों को पुलिस कमिश्नर ने तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है. विभागीय उच्चाधिकारियों द्वारा लगातार दिए जा रहे कड़े दिशा-निर्देशों और 'सोशल मीडिया पॉलिसी-2023' की खुलेआम धज्जियां उड़ाने के आरोप में इन पुलिसकर्मियों पर यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है.
आगरा पुलिस कमिश्नरेट के इस बड़े एक्शन के दायरे में 5 पुरुष उपनिरीक्षक (दरोगा), 2 महिला उपनिरीक्षक और 1 महिला आरक्षी (सिपाही) आई हैं. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इन सभी ने इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और एक्स (ट्विटर) जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पुलिस की आधिकारिक वर्दी पहनकर कई वीडियो और रील्स साझा की थीं. उच्चाधिकारियों ने इसे सीधे तौर पर घोर अनुशासनहीनता और सरकारी सेवा नियमावली के खिलाफ माना है.
आगरा के पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया के मर्यादित उपयोग को लेकर समय-समय पर सतर्क किया गया था. इसके बावजूद कुछ कर्मचारी केवल अपनी निजी लोकप्रियता हासिल करने और इंटरनेट पर फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाने के चक्कर में खाकी वर्दी और विभागीय पहचान का गलत इस्तेमाल कर रहे थे. पुलिस जैसे संवेदनशील पेशे में इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
इस निलंबन और लाइन हाजिर की कार्रवाई की जद में आए पुलिसकर्मियों की सूची भी सामने आ गई है. इनमें बाह थाने से अरविंद सिंह राठौड़ और स्वाति चौधरी, पर्यटन थाने से दीपक चौधरी, एत्माद्दौला थाने से रोहित सोनकर व प्रदीप कुमार, न्यू आगरा थाने से हिमांशु पांडेय और खेरागढ़ थाने से रानु भाटी शामिल हैं. इस सूची में कुल तीन महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, जिन्होंने नियमों की अनदेखी कर रील पोस्ट की थीं.
पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पुलिस विभाग की छवि, सरकारी काम की गोपनीयता और पेशेवर आचरण को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है. पुलिस की वर्दी पहनकर की जाने वाली ऐसी बचकानी गतिविधियां आम जनता के बीच पुलिस की निष्पक्षता और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं. ड्यूटी के दौरान रील बनाना किसी भी लोक सेवक के लिए उचित नहीं माना जा सकता.
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि 'सोशल मीडिया पॉलिसी-2023' के तहत सरकारी संसाधनों, कार्यालय की गोपनीय सूचनाओं, संवेदनशील मामलों और ड्यूटी से जुड़े कंटेंट को इंटरनेट पर सार्वजनिक करने पर पूर्ण प्रतिबंध है. भविष्य में भी जो कोई इन नियमों का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ इससे भी ज्यादा सख्त कानूनी और विभागीय कदम उठाए जाएंगे. वर्तमान में आईटी सेल को सभी पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पैनी नजर रखने का जिम्मा सौंपा गया है.