देवरिया: आठ दिन का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ, लेकिन खुशी की जगह पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई. उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सुरौली गांव में विदेश में नौकरी कर रहे शिवानंद चौरसिया का शव बुधवार को गांव पहुंचा. जैसे ही एंबुलेंस गांव में घुसी, महिलाओं की चीखें गूंज उठीं. शव देखते ही पत्नी और दोनों बच्चे फफक-फफक कर रो पड़े. सैकड़ों ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए जुट गए.
शिवानंद होरमुज स्ट्रेट के इलाके में एक जहाज पर काम कर रहे थे. अमेरिकी हमले में उनकी मौत हो गई थी. घटना के आठ दिन बाद उनका पार्थिव शरीर विमान से गोरखपुर एयरपोर्ट लाया गया और वहां से एंबुलेंस से सुरौली गांव पहुंचाया गया. परिवार और गांव वाले पिछले आठ दिनों से फोन की घंटी बजने का इंतजार कर रहे थे. उम्मीद थी कि बेटा जल्द घर लौटेगा. लेकिन जब एंबुलेंस का दरवाजा खुला तो सबकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया. शिवानंद जिंदा नहीं थे.
शव उतारने से पहले परिवार ने प्रशासन के सामने पांच बड़ी मांगें रख दीं. परिवार का कहना है कि शिवानंद परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य थे. उनकी मौत के बाद पत्नी और दो छोटे बच्चों का भविष्य अनिश्चित हो गया है. उन्होंने मुआवजे, सरकारी नौकरी और बच्चों की पढ़ाई के लिए मदद की मांग की है. परिवार ने तब तक शव उतारने से इनकार कर दिया जब तक प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता. बाद में प्रशासन के आश्वासन के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा.
शिवानंद के घर के बाहर सैकड़ों लोग जमा हो गए. महिलाएं रो रही थीं, पुरुष चुपचाप खड़े थे. बुजुर्गों का कहना था कि शिवानंद मेहनती और अच्छे स्वभाव के व्यक्ति थे. उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी अच्छे से निभाई. विदेश जाकर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया.
ग्रामीणों का कहना है कि एक परिवार का सहारा छिन गया है. पत्नी के सामने अब बच्चों को अकेले पालने की चुनौती है. लोग सरकार से जल्द मदद देने की अपील कर रहे हैं ताकि परिवार इस मुश्किल समय में टूट न जाए. स्थानीय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है.