लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को देश का सबसे बड़ा नवाचार और स्टार्टअप हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026 और उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को मंजूरी दे दी गई. नई नीति का उद्देश्य युवाओं को रोजगार, नवाचार को बढ़ावा और प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ाना है.
नई स्टार्टअप नीति के तहत 1000 करोड़ रुपये का स्टार्टअप फंड और 400 करोड़ रुपये का एकेटीयू कार्पस फंड बनाया जाएगा. साथ ही उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन की स्थापना की जाएगी, जो स्टार्टअप नीति के क्रियान्वयन, निवेश आकर्षित करने, अनुदान वितरण और नवाचार को बढ़ावा देने का काम करेगा.
UP Startup Policy 2026 के साथ युवाओं, उद्यमियों और Deep Tech स्टार्टअप्स को नई ऊर्जा मिलेगी। बेहतर वित्तीय सहायता, मजबूत Startup Ecosystem और Innovation को बढ़ावा देने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है.#UttarPradesh #Startup #Innovation #DeepTech #Entrepreneurship #CabinetDecisions pic.twitter.com/K51QPfPTp9
— UP ki Double Engine Raftaar (@UpKiRaftaarGovt) July 6, 2026
सरकार के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में 17 हजार से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हैं. नई नीति के तहत स्टार्टअप को विचार से लेकर कारोबार के विस्तार तक हर चरण में वित्तीय और संस्थागत सहायता मिलेगी. स्टार्टअप संस्थापकों को मिलने वाला भरण पोषण भत्ता 17,500 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है, जिसे अब एक वर्ष के बजाय दो वर्षों तक दिया जाएगा.
प्रोटोटाइप अनुदान पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये और सीड फंडिंग 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गई है. विशेष परिस्थितियों में यह सहायता 50 लाख रुपये तक मिल सकेगी. इसके अलावा पांच करोड़ रुपये तक की मैचिंग ग्रांट, दो करोड़ रुपये तक के टर्म लोन पर चार प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, क्लाउड सेवाओं के लिए सहायता तथा पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन के लिए वित्तीय सहयोग भी दिया जाएगा.
नई नीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी, हेल्थटेक और एग्रीटेक जैसे डीप टेक स्टार्टअप को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा. ऐसे स्टार्टअप को 20 लाख रुपये तक प्रोटोटाइप सहायता, 30 लाख रुपये तक सीड फंडिंग, 100 करोड़ रुपये तक पेशेंस कैपिटल और अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए 40 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.
सरकार 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित करेगी. साथ ही राज्य स्तरीय डीप टेक यू हब बनाया जाएगा, जहां स्टार्टअप को इन्क्यूबेशन, निवेश, मेंटरशिप और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाएं मिलेंगी. पूर्वांचल और बुंदेलखंड के इन्क्यूबेटर्स को अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी दी जाएगी.
प्रदेश में एंजेल निवेशकों, वेंचर कैपिटल फंड और निजी निवेशकों को जोड़ने के लिए राज्य स्तरीय निवेशक नेटवर्क तैयार किया जाएगा. इसके माध्यम से करीब 100 करोड़ रुपये की निजी पूंजी स्टार्टअप तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार का अनुमान है कि इस नीति से लगभग 50 हजार युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.