'उनकी रचनाएं राष्ट्र निर्माण की देती है प्रेरणा', मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि उनकी रचनाएं आज भी मानवीय मूल्यों और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा का अमूल्य स्रोत बनी हुई हैं.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महान साहित्यकार और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है. मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने अपनी लेखनी के माध्यम से भारतीय समाज की संवेदनाओं, संघर्षों और यथार्थ को सशक्त अभिव्यक्ति दी. उनकी रचनाएं आज भी समाज को दिशा देने और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का कार्य कर रही हैं.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि मुंशी प्रेमचंद केवल हिंदी और उर्दू साहित्य के महान लेखक ही नहीं थे, बल्कि वे भारतीय समाज के सच्चे चित्रकार भी थे. उन्होंने अपने उपन्यासों, कहानियों और अन्य साहित्यिक कृतियों में ग्रामीण जीवन, सामाजिक विषमता, गरीबी, शोषण, नैतिकता और मानवीय संबंधों को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया. उनकी लेखनी ने समाज को आत्ममंथन करने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में सोचने की प्रेरणा दी.
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मुख्यमंत्री ने आगे क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी उनके समय में थीं. उनके साहित्य में मानवीय संवेदनाएं, सामाजिक न्याय और राष्ट्र निर्माण का संदेश स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. यही कारण है कि उनकी कृतियां नई पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत बनी हुई हैं.
मुंशी प्रेमचंद का हिंदी साहित्य में विशेष स्थान माना जाता है. उन्हें उपन्यास सम्राट के नाम से सम्मानित किया जाता है. उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में गोदान, गबन, कर्मभूमि, रंगभूमि, निर्मला और सेवासदन जैसे उपन्यास शामिल हैं. वहीं ईदगाह, पूस की रात, कफन, बड़े घर की बेटी और नमक का दरोगा जैसी कहानियां आज भी पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं. उनकी रचनाओं में समाज की वास्तविक तस्वीर और आम लोगों के जीवन का गहरा चित्रण देखने को मिलता है.
सीएम योगी ने आगे क्या कहा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और बेहतर भविष्य की राह दिखाने वाला प्रकाश स्तंभ है. उन्होंने कहा कि उनकी अमूल्य साहित्यिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को भी मानवीय मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रेरित करती रहेगी.
मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर प्रदेश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों, साहित्यिक संगठनों और सांस्कृतिक संस्थाओं में भी उन्हें याद किया गया. कई स्थानों पर उनकी रचनाओं का पाठ, संगोष्ठियां और साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए गए. साहित्य प्रेमियों ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया.