Avadh Ojha: अवध ओझा. नाम तो सुना ही होगा. नाम न सुना हो लेकिन इस नाम के चेहरे को सोशल मीडिया पर जरूर देखा होगा. अगर आप रील देखने के शौकीन हैं तो. अभी तक ये नाम एक शिक्षक हुआ करता था. अब इस नाम के आगे राजनेता भी जुड़ गया है. कभी यूपीएससी की तैयारी करने वाले और वर्तमान में यूपीएससी के बच्चों को पढ़ाने वाले अवध ओझा अब सर ही नहीं रहे. उन्होंने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी का दामन थाम के राजनीति में एंट्री ले ली है. उनके 'आप' में शामिल होने की खबरों को आपने पढ़ लिया होगा. लेकिन उनके जीवन के कुछ अनसुने किस्सों से आप परिचित नहीं होंगे. इस लेख हम आपको अवध ओझा के वही अनसुने किस्से सुनाने वाले हैं.
अवध ओझा आज के समय में सिर्फ एक नाम ही नहीं बल्कि ब्रांड बन चुके हैं. टीचिंग फील्ड में उन्होंने अपनी एक अलग ही पहचान बना ली है. इस पहचान के पीछे अवध के कई किस्से भी हैं. इलाहाबाद पर अपनी जान कुर्बान करने वाले अवध ओझा ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत दिल्ली से की है. भले ही उन्होंन दिल्ली से राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी लेकिन शायद जल्द ही वह यूपी की राजनीति में भी देखें जा सकते हैं. खैर ये तो एक दूसरा विषय है. आइए हम उनके अनसुने किस्सों को जानते हैं.
यूपी के गोंडा के रहने वाले अवध ओझा की कर्मभूमि इलाहाबाद (अब प्रयागराज) रही. लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में अवध ओझा ने कहा था कि वह एक बार फिल्म देखने गए थे. फिल्म का नाम था चरस. सिनेमा हाल में उनके साथ एक घटना घटती थे. वहीं किसी ने अवध ओझा से कहा कि तुम स्कूटर से चलते हो और रंगबाजी में रहते हो. इतना कहकर अवध को उस व्यक्ति ने थप्पड़ भी मार दिया. इस बात से गुस्स होकर अवध घर चले गए.
थप्पड़ खाने से अवध ओझा का सिर झल्लाया हुआ था. उन्होंने बताया, "मैंने फिल्म छोड़ी और घर चला गया. एक दोस्त के पास गया और उससे बोला कि इसको मारना है. इसके बाद मैंने गोली चला दी. गोली चलाने के बाद मैं एक महीने फरार रहा. फिर मां ने मेरी जमानत करा दी. मुझे जेल नहीं जाना पड़ा."
उन्होंने बताया कि 18 या 19 साल की उम्र में उनके ऊपर कई केस हो गए थे, जिसमें से आधे से ज्यादा फर्जी मुकदमे थे.
अवध ओझा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता ने उन्हें एक बार सिगरेट पीते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया था. घर पहुंचने पर पिता ने उनसे पूछा कि कौन से ब्रांड का सिगरेट पीते हो. अवध ने पिता को बताया कि एस्ट्रे. इसके बाद उनके पिता घर पर सिगरेट के दो डिब्बे और एक लाइटर लाकर रख दिया और कहा कि चोरों की तरह दुकान के पीछे छिपकर क्यों सिगरेट पीते हो घर पर ही पियो.
अवध ओझा ने बताया था कि इस घटना के बाद उन्होंने सिगरेट को कभी हाथ नहीं लगाई. अवध के पिता जी पोस्ट मास्टर थे और उनकी मां वकील थीं.
अवध ओझा ने एक नहीं कई बार कहा था कि वह राजनीति में कभी नहीं जाएंगे. लेकिन कहते न कि समय के हिसाब से आपको बदलना पड़ता है और आज अवध ओझा आम आदमी पार्टी के नेता बन गए हैं. सूत्रों की मानें तो 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के टिकट से चुनाव लड़ने की कोशिश की थी लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला. वहीं मायावती ने उन्हें ऑफर दिया था कि वो चाहें जहां से चुनाव लड़ सकते हैं. हालांकि, उन्होंने मायावती के ऑफर को ठुकरा दिया था.
लल्नटॉप को दिए इंटरव्यू में अवध ओझा ने कहा था कि वह कभी भी बीजेपी से चुनाव नहीं लड़ेंगे.क्योंकि वह एक शिक्षा ने उन्हें इस ऊंचाई पर पहुंचाया है तो इसी फील्ड में वह कुछ करेंगे. उन्होंने कहा था, "मैं इलाहबाद (अब प्रयागराज) में स्कूल खोलने जा रहा हूं. क्योंकि पढ़ाई-लिखाई ने मुझे इतना बड़ा नाम दिया, इज्जत दी, पैसा दिया. तो मैं तो उसी विधा को आगे बढ़ाऊंगा. हां, मेरे साथ के जो हैं, वो राजनीति करेंगे. मैं अच्छे लोगों की टीम ही तैयार कर रहा हूं. जिसमें पढ़े-लिखे लोग हैं: लॉयर हैं, डॉक्टर हैं, IPS हैं, IAS हैं.”