लखनऊ में आयोजित शिक्षक संवाद कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शिक्षा और तकनीक के बदलते रिश्ते पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर रोजगार जाने की चिंता के बजाय इसके नए अवसरों को समझना चाहिए. उनके मुताबिक, एआई का इस्तेमाल शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में किया जा सकता है.
ब्रजेश पाठक ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था की जड़ें बेहद पुरानी और समृद्ध हैं. तक्षशिला और नालंदा जैसे संस्थान देश की ऐतिहासिक शैक्षिक परंपरा की मिसाल रहे हैं. अब तकनीक तेजी से बदल रही है, इसलिए शिक्षा प्रणाली में भी समय के अनुरूप बदलाव जरूरी है.
उन्होंने कहा कि एआई का सही इस्तेमाल पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर करने, विद्यार्थियों को नई जानकारी उपलब्ध कराने और शिक्षण प्रक्रिया को आधुनिक बनाने में मददगार हो सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक शिक्षक की भूमिका को खत्म नहीं कर सकती.
उपमुख्यमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं माना. उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण और उनके संस्कारों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं. तकनीकी बदलाव के दौर में यह जिम्मेदारी और महत्वपूर्ण हो गई है. उन्होंने दावा किया कि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है और विभिन्न अभियानों के जरिए बड़ी संख्या में बच्चों को स्कूलों से जोड़ा जा रहा है. उनके मुताबिक, आधुनिक तकनीक और मानवीय मार्गदर्शन का संतुलन शिक्षा के लिए बेहतर परिणाम दे सकता है.
ब्रजेश पाठक ने प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में इस समय 83 मेडिकल कॉलेज पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं. उनके अनुसार, वर्ष 2017 से पहले राज्य में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में करीब 40 मेडिकल कॉलेज थे. उन्होंने कौशल विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं को रोजगार के साथ स्वरोजगार के लिए भी तैयार किया जा रहा है, ताकि उनके लिए अवसरों का दायरा बढ़ सके.
कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ यानी ओडीओपी योजना को भी प्रदेश की उपलब्धियों से जोड़कर देखा. उन्होंने कहा कि इस पहल के जरिए अलग-अलग जिलों के स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक हुनर को देश और विदेश में पहचान मिल रही है.
शिक्षक संवाद कार्यक्रम में लखनऊ के विभिन्न स्कूलों से आए शिक्षकों ने शिक्षा की गुणवत्ता, एआई, तकनीकी बदलाव, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े सवाल पूछे. पाठक ने शिक्षकों के सवालों और सुझावों पर विस्तार से जवाब दिया. कार्यक्रम में इंस्पिरेशन एकेडमिक कंसल्टेंट्स की प्रेरणा त्रिपाठी समेत कई शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे.