'मुझे बचा लो...' चश्मदीदों ने अतीक के बेटे अबान अहमद के आखिरी शब्दों को किया याद

मौके पर सबसे पहले पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि गंभीर रूप से घायल अबान बार-बार "मुझे बचा लो" कहकर मदद की गुहार लगा रहा था.

@rishibagree
Sagar Bhardwaj

झांसी-कानपुर हाईवे पर हुए भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अबान अहमद के आखिरी शब्द प्रत्यक्षदर्शियों के दिलों में बस गए. मौके पर सबसे पहले पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि गंभीर रूप से घायल अबान बार-बार "मुझे बचा लो" कहकर मदद की गुहार लगा रहा था. हालांकि कार इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी कि उसे बाहर निकालने में काफी समय लग गया. बाद में अबान और उसके दोस्त सोनू ने दम तोड़ दिया.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कैसे हुआ हादसा

प्रत्यक्षदर्शी पप्पू यादव और दीपक यादव के अनुसार वे हाईवे से गुजर रहे थे, तभी अचानक एक बछड़ा सड़क पर आ गया. उसी समय एक मोटरसाइकिल भी सामने आ गई. कानपुर की ओर से तेज रफ्तार में आ रही क्रेटा कार ने पहले बछड़े और फिर बाइक को बचाने की कोशिश की, लेकिन चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका. इसके बाद कार डिवाइडर से टकरा गई और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. हालांकि हादसे के कारणों की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है.


लोहे की रॉड से तोड़ी कार, तब निकले घायल

ग्रामीणों ने बताया कि दुर्घटना के बाद कार के दरवाजे जाम हो गए थे. घायलों को निकालने के लिए गांव से टायर लीवर और लोहे की रॉड मंगाई गई. कांच तोड़कर किसी तरह अबान और अन्य लोगों को बाहर निकाला गया. सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और कार में फंसे बाकी तीन घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल भेजा. पुलिस के अनुसार तीनों घायलों की हालत फिलहाल स्थिर है.

तेज रफ्तार और सुरक्षा उपायों पर सवाल

प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि दुर्घटना के समय कार की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक थी. ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कार में सवार किसी व्यक्ति ने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी. कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि हादसे के दौरान एयरबैग समय पर नहीं खुले. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस व वाहन विशेषज्ञ तकनीकी जांच कर रहे हैं.

कार से मिली किताबें, अंतिम संस्कार की तैयारी

पुलिस की तलाशी के दौरान कार से सिगरेट के पैकेट और दो नई किताबें मिलीं. स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि ये किताबें झांसी जेल में बंद अबान के भाई अली अहमद के लिए लाई गई थीं, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. वहीं परिजनों ने अली अहमद और लखनऊ जेल में बंद एक अन्य भाई को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की है. घटना के बाद झांसी-कानपुर हाईवे पर लंबा जाम लग गया, जिसे पुलिस ने वैकल्पिक मार्ग से यातायात संचालित कर कुछ समय बाद सामान्य कराया.