आत्मा, पूजा, पत्नी और पुजारियों की हत्या… कहां से जुड़ी है आजमगढ़ मामले की कड़ी?
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में मंगलवार की शाम एक ऐसी घटना हुई, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया. जिस घर में पिछले तीन दिनों से पूजा-पाठ और महामृत्युंजय जाप चल रहा था, उसी घर में अचानक गोलियां चलने लगीं.
आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में मंगलवार की शाम एक ऐसी घटना हुई, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया. जिस घर में पिछले तीन दिनों से पूजा-पाठ और महामृत्युंजय जाप चल रहा था, उसी घर में अचानक गोलियां चलने लगीं. कुछ ही देर में घर में चीख-पुकार मच गई. एक महिला और दो पुरोहितों की गोली मारकर हत्या कर दी गई.
इसके बाद आरोपी अरविंद सिंह अपने तीन बच्चों को लेकर एक कमरे में बंद हो गया. उसके हाथ में रिवॉल्वर थी और बाहर पुलिस की टीम मौजूद थी. करीब 7 घंटे तक पुलिस ने बातचीत के जरिए उसे समझाने और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की. लेकिन मामला शांत नहीं हुआ. बाद में कमरे के अंदर से गोली चलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की. इस दौरान आरोपी घायल हुआ और अस्पताल में उसकी मौत हो गई. उसके 8 साल के बेटे शौर्य की भी गोली लगने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई.
घर में किस वजह से कराया जा रहा था महामृत्युंजय जाप?
जानकारी के अनुसार, घर में महामृत्युंजय जाप खास तौर पर अरविंद सिंह के लिए कराया जा रहा था. परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें आशंका थी कि अरविंद के ऊपर किसी तरह का साया है. इसी वजह से तीन दिनों से घर में पूजा और धार्मिक अनुष्ठान कराया जा रहा था. अरविंद की पत्नी बबीता सिंह तीन पुरोहितों के साथ पूजा करा रही थीं.
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हालांकि, साया होने की बात परिवार की धारणा और उनके बयानों पर आधारित है. इसका कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित वैज्ञानिक आधार सामने नहीं आया है. मंगलवार शाम तक सब कुछ सामान्य नजर आ रहा था, लेकिन अरविंद के घर पहुंचते ही स्थिति बदल गई.
पुरोहितों से विवाद के बाद बिगड़ी स्थिति:
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार शाम करीब 5:30 बजे अरविंद घर पहुंचा. उस समय घर में पूजा चल रही थी. बताया गया है कि अरविंद ने वहां मौजूद पुरोहितों से उनका आधार कार्ड मांगना शुरू किया. इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया. उसकी पत्नी बबीता ने कथित तौर पर पुरोहितों के साथ हो रहे व्यवहार का विरोध किया. इसके बाद विवाद इतना बढ़ गया कि गोली चलने लगी.
परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, अरविंद ने पहले अपनी पत्नी बबीता को गोली मारी. इसके बाद वहां मौजूद पुरोहितों में से एक किसी तरह वहां से निकल गया, जबकि दो अन्य पुरोहितों को गोली मार दी गई. कुछ ही मिनटों में पूजा वाला घर एक गंभीर वारदात की जगह में बदल गया.
7 घंटे तक पुलिस करती रही समझाने की कोशिश:
पत्नी और दो पुरोहितों को गोली मारने के बाद अरविंद अपने तीन बच्चों को लेकर घर के एक कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया. कमरे में उसके तीन बच्चे थे. पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ अरविंद को बाहर निकालना नहीं थी, बल्कि कमरे में मौजूद तीनों बच्चों की जान बचाना भी थी. पुलिस ने अरविंद से बातचीत कर उसे सरेंडर करने के लिए कहा. परिवार के सदस्यों के जरिए भी उससे बात करने की कोशिश की गई. करीब सात घंटे तक पुलिस ने धैर्य बनाए रखा.
जानकारी के मुताबिक, अरविंद बच्चों को अपने पास रखे हुए था और पुलिस के सामने बाहर आने को तैयार नहीं था. पुलिस लगातार कोशिश कर रही थी कि किसी तरह बातचीत के जरिए मामला शांत हो और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके. लेकिन स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आई.
स्टन ग्रेनेड और टियर गैस के बाद कमरे में दाखिल हुई पुलिस:
गोली चलने के बाद पुलिस ने ऑपरेशन आगे बढ़ाने का फैसला किया. पुलिस के मुताबिक, टीम ने स्टन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल किया. इसके बाद कमरे का दरवाजा तोड़ा गया और पुलिस टीम अंदर दाखिल हुई. पुलिस का कहना है कि अंदर अरविंद ने टीम पर भी फायरिंग की. इसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें अरविंद घायल हो गया.
कमरे के अंदर 8 साल का बेटा शौर्य भी गोली लगने से घायल मिला. उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. वहीं, दोनों बच्चियों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया. अरविंद को भी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई.
2018 में हुई भाई की हत्या से जुड़ती है कहानी:
परिवार के मुताबिक, इस घटना की एक अहम कड़ी साल 2018 से जुड़ी हुई है. 12 अक्टूबर 2018 को अरविंद के बड़े भाई सुनील सिंह की हत्या कर दी गई थी. परिवार का कहना है कि भाई की हत्या के बाद अरविंद के व्यवहार में काफी बदलाव आया था. बताया गया है कि वह लोगों से कम मिलने लगा और अक्सर अकेला रहने लगा था. हालांकि, पुराने मामले और मंगलवार की घटना के बीच क्या सीधा संबंध है, यह जांच का विषय है.
परिवार के मुताबिक, साल 2015 में बबीता ने पड़ोस के दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था. इस मामले में दोनों आरोपियों को 20-20 साल की सजा मिलने की बात भी सामने आई है. इसी मामले की सुनवाई के दौरान 2018 में सुनील सिंह की हत्या हुई थी. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर अरविंद ने ऐसा क्यों किया.