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सपा को बड़ा झटका! 14 अक्टूबर को BJP में शामिल होंगे 4 बागी विधायक

समाजवादी पार्टी के चार बागी विधायक 14 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे.

Shilpa Shrivastava
Sushil Tiwari
Reported By: Sushil Tiwari
सपा को बड़ा झटका! 14 अक्टूबर को BJP में शामिल होंगे 4 बागी विधायक
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के चार बागी विधायक 14 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे. इनमें अमेठी की गौरीगंज सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या की गोसाईगंज सीट से विधायक अभय सिंह, अंबेडकरनगर की जलालपुर सीट से विधायक राकेश पांडेय और जालौन की कालपी सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं. इन चारों विधायकों ने 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करके पार्टी से अलग रुख अपनाया था.

अमेठी के गौरीगंज में होगा सदस्यता कार्यक्रम:

राकेश प्रताप सिंह ने गुरुवार को भाजपा में शामिल होने की घोषणा की. उन्होंने बताया कि 14 अक्टूबर को अमेठी के गौरीगंज में आयोजित कार्यक्रम में हजारों कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा की सदस्यता ली जाएगी. दोपहर 12 बजे मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि जो राम और राष्ट्र का नहीं, उसके साथ नहीं चल सकते. उन्होंने यह भी बताया कि कार्यक्रम में पूर्व सांसद स्मृति ईरानी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी समेत पार्टी के कई नेता मौजूद रहेंगे. राकेश प्रताप सिंह ने दावा किया कि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव में गौरीगंज सीट पर 21 साल बाद जीत दर्ज करेगी.

धर्म विरोधी राजनीति से असहमति का हवाला:

भाजपा में शामिल होने के फैसले पर राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि वह समाजवादी पार्टी के तीन बार विधायक रहे हैं. करीब तीन साल पहले सपा में रहते हुए भी उन्होंने अपनी आपत्तियां जाहिर की थीं. उनके मुताबिक, उन्होंने कहा था कि राजनीति में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने या धर्म से जुड़े मुद्दों पर विवाद करने के लिए नहीं आए हैं. उनका कहना था कि राजनीति का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के विकास के साथ गरीबों और वंचितों की मदद करना होना चाहिए.

राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि उनकी बातों को अनसुना किया गया, जिसके बाद उन्होंने विरोध का रास्ता अपनाया. उन्होंने दावा किया कि वह ऐसे लोगों के साथ राजनीति नहीं कर सकते, जो धर्म के प्रति शत्रुता रखते हैं. उनके अनुसार, यह फैसला टिकट या विधायक पद से जुड़ा नहीं है, बल्कि उन्होंने इन सबसे ऊपर उठकर अपनी राजनीतिक दिशा तय की है.

राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग से बढ़ी थी दूरी:

फरवरी 2024 में उत्तर प्रदेश में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के सात विधायकों ने पार्टी की घोषित राजनीतिक लाइन से अलग जाकर भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया था. इस घटनाक्रम से सपा को झटका लगा और पार्टी का तीसरा राज्यसभा उम्मीदवार चुनाव हार गया, जबकि भाजपा के सभी आठ उम्मीदवारों की जीत हुई.

क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों में अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह, मनोज पांडेय, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी, आशुतोष मौर्य और राकेश पांडेय के नाम शामिल थे. सपा ने राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और मनोज पांडेय को पार्टी से निष्कासित कर दिया था. अन्य विधायकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी राजनीतिक चर्चा होती रही. पूजा पाल का नाम इस संदर्भ में प्रमुख रहा. मनोज पांडेय बाद में भाजपा में शामिल हो गए और वर्तमान में योगी सरकार में मंत्री हैं.

राकेश प्रताप सिंह का राजनीतिक सफर:

गौरीगंज से विधायक राकेश प्रताप सिंह वर्ष 2012 से समाजवादी पार्टी के साथ जुड़े रहे. उन्होंने 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में सपा के टिकट पर जीत दर्ज की. इस तरह 2022 में वह लगातार तीसरी बार विधायक बने.

मई 2023 में गौरीगंज थाने के भीतर भाजपा नेता दीपक सिंह के साथ मारपीट की घटना भी चर्चा में आई थी. उस समय दीपक सिंह की पत्नी नगर पालिका चुनाव में प्रत्याशी थीं. उपलब्ध विवरण के मुताबिक, पुलिस के रोकने से पहले राकेश प्रताप सिंह ने दीपक सिंह को कई थप्पड़ और घूंसे मारे थे.

अभय सिंह की पूर्वांचल में बाहुबली नेता की पहचान:

अयोध्या की गोसाईगंज विधानसभा सीट से विधायक अभय सिंह पहली बार 2012 में सपा के टिकट पर विधायक बने थे. 2017 के चुनाव में उन्हें खब्बू तिवारी ने हराया, लेकिन 2022 में उन्होंने दोबारा जीत हासिल की. इस तरह वह लगभग 2012 से 2024 तक सपा के साथ रहे.

अभय सिंह की पहचान पूर्वांचल में बाहुबली नेता के रूप में रही है. वह पहले मुख्तार अंसारी के करीबी माने जाते थे, जबकि बाद में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के साथ उनके संबंध मजबूत होने की बात सामने आई. फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में उन्होंने सपा के उम्मीदवार के बजाय भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया.

इसके बाद अभय सिंह का एक वीडियो भी चर्चा में रहा. इसमें एक मीडिया चैनल को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि मुलायम सिंह यादव ने जेल में रहते हुए उन्हें टिकट दिया था और वह विधायक बने थे. उन्होंने कहा था कि जिस नेता और पार्टी का इतना बड़ा एहसान है, जब वे कहेंगे कि उन्हें जरूरत नहीं है, तब वह राजनीति से हटकर घर बैठ जाएंगे, लेकिन किसी दूसरी पार्टी में नहीं जाएंगे.

विनोद चतुर्वेदी का कांग्रेस से सपा तक का सफर:

विनोद चतुर्वेदी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी. वह लंबे समय तक जालौन जिला कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और प्रदेश कांग्रेस में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं. वर्ष 2007 में पहली बार विधायक बने. इसके बाद 2021 में कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए.

2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने उन्हें कालपी सीट से उम्मीदवार बनाया. उन्होंने निषाद पार्टी के छोटे सिंह को 2,816 मतों से हराया. बुंदेलखंड में कांग्रेस के पुराने नेताओं में उनकी पहचान रही है.

राकेश पांडेय का राजनीतिक और पारिवारिक आधार:

राकेश पांडेय ने 2002 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर जलालपुर सीट से पहली बार विधानसभा चुनाव जीता. 2007 में हारने के बाद वह 2009 में बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए और अंबेडकरनगर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए. वह 2009 से 2014 तक लोकसभा सदस्य रहे.

2022 के विधानसभा चुनाव से पहले वह सपा में लौट आए और जलालपुर सीट से चुनाव लड़ा. उन्होंने बसपा के राजेश सिंह को 13,630 मतों से हराया और उन्हें कुल 93,668 वोट मिले. उनका परिवार भी अंबेडकरनगर की राजनीति में सक्रिय रहा है. उनके बेटे रितेश पांडेय जलालपुर से विधायक और अंबेडकरनगर से सांसद रह चुके हैं. उनके भाई पवन पांडेय भी अकबरपुर से विधायक रहे हैं.

गौरीगंज में भाजपा के सामने चुनावी चुनौती:

राकेश प्रताप सिंह का भाजपा में शामिल होने का कार्यक्रम 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गौरीगंज की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वह लगातार तीन बार इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के बीच रहे समीकरण भी आगामी चुनाव के संदर्भ में अहम होंगे. हालांकि, भाजपा में शामिल होने के बाद राकेश प्रताप सिंह की आगामी चुनाव में भूमिका या उन्हें टिकट दिए जाने को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

2024 के लोकसभा चुनाव में गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा को 1,08,426 वोट मिले थे, जबकि भाजपा की स्मृति ईरानी को 75,048 वोट मिले. दोनों के बीच 33,378 मतों का अंतर था. ऐसे में राकेश प्रताप सिंह की भाजपा में संभावित एंट्री के बाद गौरीगंज के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में क्या बदलाव आता है, इस पर नजर रहेगी.