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'...कोई ताकत मुझे रोक नहीं सकती', 2029 चुनाव को लेकर बृजभूषण के बयान से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि 2029 में उन्हें चुनाव लड़ने से कोई नहीं रोक सकता. उन्होंने साफ कहा कि बीजेपी टिकट दे या न दे, वे चुनाव मैदान में उतरेंगे. उनके बयानों से सियासी चर्चा तेज हो गई है.

Kanhaiya Kumar Jha
'...कोई ताकत मुझे रोक नहीं सकती', 2029 चुनाव को लेकर बृजभूषण के बयान से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
Courtesy: Social Media

गोंडा: यूपी की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 2029 लोकसभा चुनाव को लेकर ऐसा बयान दिया है जिसने पूरे प्रदेश में नई सियासी चर्चा छेड़ दी है.

गोंडा में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने साफ कहा कि चाहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) टिकट दे या न दे, वह आने वाले चुनाव में मैदान में उतरेंगे. उन्होंने कहा कि उन्हें 2029 में चुनाव लड़ने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती. बृजभूषण के इस बयान का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

'बीजेपी टिकट देगी तो ठीक, नहीं देगी तो पैदल लड़ूंगा'

गोंडा में मीडिया से बातचीत के दौरान पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा, 'अगर बीजेपी लड़ाएगी तो लड़ेंगे, नहीं लड़ाएगी तो पैदल लड़ेंगे. जरूर लड़ेंगे. बीजेपी लड़ाएगी तो बहुत-बहुत धन्यवाद, अगर नहीं लड़ाएगी तो पैदल लड़ जाएंगे.'

उनका यह बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है. वायरल हो रहे एक अन्य वीडियो में बृजभूषण कहते नजर आ रहे हैं कि वे 2027 का चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन 2029 का चुनाव हर हाल में लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई ताकत मुझे 2029 में चुनाव लड़ने से रोक नहीं सकती.

हमारी विचारधारा पूरी तरह भाजपाई

बृजभूषण शरण सिंह ने बातचीत के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि उनका राजनीतिक आधार हमेशा से भाजपा रहा है. उन्होंने कहा, 'मेरा एक बेटा भाजपा से विधायक है और दूसरा बेटा भाजपा से सांसद है. भतीजा ब्लॉक प्रमुख है और मेरी पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं. हमारी पूरी टीम भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से जुड़ी है. मैं जो सत्य बोलता हूँ, उससे अटकलें लगाई जाती हैं कि मैं कहीं और चला जाऊंगा, लेकिन सच बोलना कोई अपराध नहीं है.'

सियासी हलचल तेज

बृजभूषण के इन बयानों ने प्रदेश की सियासत में अटकलों को हवा दे दी है. उनके समर्थक इस बयान को मजबूती के तौर पर देख रहे हैं, जबकि विरोधी इसे चुनावी रणनीति मान रहे हैं. सोशल मीडिया पर उनके बयानों को लेकर चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं और राजनीतिक गलियारों में भी यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है.