नई दिल्ली: जेईई मेन्स सत्र 1 के रिजल्ट में 93 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 41 टॉपर रहे, जिनमें 12 उम्मीदवार ऐसे हैं जिन्होंने 100 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. उच्च उपलब्धि हासिल करने वालों में राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक छोटे से गांव के निवासी दशरथ चौधरी भी शामिल हैं, जिन्होंने दो साल से अधिक की तैयारी के बाद 99.62 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. उन्होंने अपनी सफलता को 'कड़ी मेहनत का परिणाम'बताया.
कहते हैं सही दिशा में मेहनत वो चाभी है जिससे तरक्की का दरवाजा खुलता है. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है कलयुग के दशरथ ने. अपने पहले ही प्रयास में, दशरथ अपने 'भूरतिया' गांव से बीई/बी.टेक परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवारों में जिले के टॉपर के रूप में उभरे. अपनी खुशी जाहिर करते हुए दशरथ ने कहा कि उन्होंने आईआईटी और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश के लिए अंतिम चरण की परीक्षा, जेईई एडवांस्ड की तैयारी शुरू कर दी है.
उन्होंने कहा 'यह मेरी मेहनत का फल है. अब मैं पूरी तरह से अप्रैल में होने वाली जेईई एडवांस्ड परीक्षा की तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं. मुझे पूरा विश्वास है कि मैं इसे पास कर लूंगा और इंजीनियर बनने का अपना सपना पूरा करूंगा,' .
दशरथ के पिता, रावतराम, जो राजस्थान पुलिस में इंस्पेक्टर हैं, ने अपने परिवार और गांव वालों के साथ मिलकर उनकी इस उपलब्धि का बड़े उत्साह से जश्न मनाया. उनके कोचिंग संस्थान ने भी उन्हें पारंपरिक पगड़ी बांधकर, माला पहनाकर और मिठाई भेंट करके सम्मानित किया.
सत्र 1 की परीक्षा 21 जनवरी से 29 जनवरी तक कंप्यूटर आधारित मोड में आयोजित की गई थी. परीक्षा प्रतिदिन दो शिफ्टों में आयोजित की गई थी - सुबह की शिफ्ट सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दोपहर की शिफ्ट दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक.
बीई/बीटेक के पेपरों के लिए परीक्षा 21 जनवरी से 28 जनवरी तक आयोजित की गई थी. उम्मीदवारों और विशेषज्ञों ने समग्र कठिनाई स्तर को मध्यम बताया, जिसमें शिफ्ट और विषयों के अनुसार भिन्नताएं थीं.