पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही कुर्सी की जंग अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच चुकी है. आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी के बड़े नेताओं के बीच की कलह खुलकर चौराहों पर आ गई है. पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच चल रहे इस बड़े पावर गेम में अब अचानक नवजोत सिंह सिद्धू के करीबियों की एंट्री हो गई है, जिसने दिल्ली बैठे आलाकमान की चिंता को काफी बढ़ा दिया है.
इस पूरे सियासी ड्रामे में नया मोड़ तब आया जब पूर्व मंत्री रजिया सुल्ताना के पति और सूबे के पूर्व डीजीपी मुहम्मद मुस्तफा ने मैदान में कदम रखा. उन्होंने सीधे कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को एक खुला पत्र लिख डाला. इस चिट्ठी में मुस्तफा ने पंजाब की मौजूदा गुटबाजी पर गहरी चिंता जताई और फैसले लेने में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने साफ शब्दों में राजा वड़िंग के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि राज्य में संगठन की कमान किसी ऐसे मजबूत और योग्य चेहरे को सौंपी जानी चाहिए जो सबको साथ लेकर चल सके. हालांकि, इस पूरे मामले पर खुद नवजोत सिंह सिद्धू ने अभी तक अपनी जुबान नहीं खोली है लेकिन उनके करीबियों के तेवर बताते हैं कि वे चन्नी के बहाने वड़िंग को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते.
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी मौजूदा प्रधान राजा वड़िंग को पद पर बनाए रखने से काफी समय से खफा चल रहे हैं. अपनी इसी नाराजगी को दिखाने के लिए चन्नी ने मोरिंडा में एक बड़ी बैठक बुलाई, जिसे उनका सीधा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है. चन्नी के इस कदम से भांपते हुए राजा वड़िंग भी तुरंत एक्शन मोड में आ गए हैं. चन्नी की भारी भीड़ का जवाब देने के लिए वड़िंग ने अब घर-घर जाकर पार्टी के पुराने और नाराज नेताओं से मिलना शुरू कर दिया है. वड़िंग बंद कमरों में मैराथन बैठकें कर रहे हैं ताकि वह आलाकमान के सामने यह साबित कर सकें कि संगठन के बहुसंख्यक नेता आज भी उनके साथ मजबूती से खड़े हैं और चन्नी का दावा पूरी तरह खोखला है.
चन्नी की तरफ से चुनौती मिलने के ठीक अगले ही दिन राजा वड़िंग ने पंजाब के अलग-अलग जिलों का दौरा तेज कर दिया. उन्होंने सबसे पहले पूर्व सांसद शमशेर सिंह दूलो के घर जाकर उनके साथ करीब पौने घंटे तक अकेले में गुफ्तगू की, जिन्हें चन्नी का धुर विरोधी माना जाता है. इसके बाद वड़िंग ने गांधी परिवार के बेहद खास नेता राणा केपी सिंह, पूर्व विधायक हरदयाल कंबोज, जसबीर सिंह गिल और कुलदीप वैद जैसी बड़ी सियासी शख्सियतों से मुलाकात की. राजा वड़िंग इन मुलाकातों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर लगातार जारी कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर चन्नी गुट के खिलाफ एक बड़ा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है.